Begusarai

बेगूसराय के सिमरिया गंगा घाट पर 3 युवक डूबे:दो दिन से लापता, नहीं मिला सुराग

बेगूसराय के सिमरिया गंगा घाट पर बुधवार को तीन युवकों के डूबने की सूचना पर दूसरे दिन भी स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाया। लेकिन किसी का भी शव बरामद नहीं हो सका है।एफसीआई थाना क्षेत्र के बीहट मकससपुर के रहने वाले उमाशंकर साह के बेटे विशाल कुमार और अमन कुमार व मुंगेर के काशिम बाजार निवासी रवि कुमार भारती उर्फ सुबोध के बेटे मयंक कुमार बुधवार को सिमरिया गंगा तट पर स्नान करने गए थे।

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गंगा किनारे मिली बाइक-हेलमेट

 

काफी देर तक जब तीनों वापस नहीं लौटे, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। जिसमें गंगा तट पर तीनों भाइयों के चप्पल, कपड़े, मोबाइल, बाइक और हेलमेट रखे मिले। इसके बाद परिजनों ने उनके डूबने की आशंका जताते हुए प्रशासन से शवों को ढूंढने की गुहार लगाई। तब से खोजबीन किया जा रहा है। गुरुवार को भी खोजबीन में कुछ पता नहीं चला।उमाशंकर साह को दो बेटे और तीन बेटियां थी। एक साथ दोनों बेटों के खो जाने से माता-पिता सहित पूरे परिवार की आंखों के आंसू नहीं थम रहे हैं। बीहट मकससपुर मुहल्ला में सन्नाटा पसरा हुआ है। हर कोई इस दुखद घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा है। विशाल की शादी दो साल पहले ही हुई थी और एक साल की बेटी है।

 

विशाल अपने पिता के साथ खेतीबाड़ी और मवेशी पालन कर घर का भरण-पोषण करते थे। जबकि अमन अभी आईटीआई (ITI) की पढ़ाई कर रहा था और अपने उज्जवल भविष्य की तैयारी में जुटा था। मयंक कक्षा छह का छात्र था। वह महज चार दिन पहले ही बीहट स्थित अपने ननिहाल आया था।इस हादसे ने सिमरिया गंगा तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन अगर समय रहते चेत जाता, तो आज इन तीन युवकों की जान नहीं जाती। यहां साल में केवल दो महीने श्रावणी मेला और कार्तिक कल्पवास मेला में ही एसडीआरएफ की टीम गंगा नदी में मुस्तैद रहती है।

 

आधे से अधिक गोताखोरों को ड्यूटी से हटाने का आरोप

 

10 महीने लाखों श्रद्धालु भगवान भरोसे ही डुबकी लगाते हैं। घाट से 500 मीटर दूर बिहार सरकार के पंचायत भवन में एसडीआरएफ के जवान रहते हैं। लेकिन वे लोग घाट पर ड्यूटी नहीं करते। केवल अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में ही तैनात रहते हैं। सिमरिया घाट पर हादसा रोकने के लिए 2011 से 10 स्थानीय प्रशिक्षित गोताखोरों को रबर बोट के साथ तैनात किया गया था।यह सभी गोताखोर मुस्तैदी से लोगों की जान बचाते थे। लेकिन प्रशासन ने इनमें से आधे से अधिक गोताखोरों को ड्यूटी से हटा दिया। जो बचे हुए हैं, वे समय पर पारिश्रमिक नहीं मिलने के कारण परेशान रहते हैं। कल भी सूचना मिलने के बाद इन्हीं लोगों ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। लेकिन काफी कोशिश के बाद भी अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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