समस्तीपुर:जूट मिल में एक बार फिर बजा सायरन,लेकिन मजदूरों के चेहरों पर अब भी मायूसी
समस्तीपुर: जिले का गौरव कहे जाने वाले एकमात्र रामेश्वर जूट मिल मुक्तापुर में सात महीने के लंबे सन्नाटे के बाद एक बार फिर सायरन की गूंज तो सुनाई दी, लेकिन मिल के आम मजदूरों के चेहरों पर रौनक लौटने के बजाय मायूसी और आक्रोश साफ नजर आ रहा है. अधिकारियों और प्रबंधन द्वारा मिल चालू करने की घोषणा के बाद भी मजदूर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
सायरन बजाकर रस्म अदायगी, पर कच्चा माल नदारद
विगत सात महीनों से बंद पड़ी इस मिल का ताला खोलने के लिए उप श्रम आयुक्त (दरभंगा) राकेश रंजन, श्रम अधीक्षक (समस्तीपुर) संजय पासवान, पर्सनल मैनेजर फ्रांको घोष, कमर्शियल मैनेजर एसके जैन, मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नौशाद आलम तथा महासचिव अमरनाथ सिंह ने संयुक्त रूप से सायरन बजाकर मिल को चालू तो कर दिया.लेकिन ग्राउंड जीरो पर सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है.मजदूरों का कहना है कि किसी भी जूट मिल में उत्पादन शुरू करने के लिए सबसे पहले कच्चे जूट (कच्चा माल) की जरूरत होती है. वर्तमान में मिल परिसर में कच्चे माल का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है. ऐसे में यह गंभीर और शोचनीय प्रश्न खड़ा होता है कि बिना कच्चे माल के मिल में उत्पादन आखिर कैसे शुरू होगा?
प्रबंधन और यूनियन के दावों पर उठे सवाल
आम मजदूरों की मानें तो मिल को चालू करने का यह पूरा घटनाक्रम महज एक ‘स्वांग’ और ढोंग है. खुद प्रबंधन और मजदूर संघ के बयानों के मुताबिक, मिल का सायरन भले ही बज गया हो, लेकिन मजदूरों को वास्तव में काम पाने के लिए अभी महीनों का इंतजार करना पड़ेगा. आरोप है कि प्रबंधन अपनी सुविधानुसार मिल को खोलता और बंद करता रहता है. जब भी मजदूर अपने हक और बकाए की आवाज उठाते हैं, तो मिल को बंद कर उनकी आवाज को दबा दिया जाता है. मजदूरों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा एक गुट के सहयोग से मिल खोलकर अपना ‘उल्लू सीधा’ किया जाता है, और फिर अपनी सुविधा के अनुसार उसे बंद कर दूसरे गुट को आगे कर दिया जाता है. इस खेल में मजदूर सिर्फ पिसकर रह गया है.असली मिल उसी दिन चालू माना जाएगा, जब मजदूरों का लंबित बकाया भुगतान अद्यतन किया जाए, उन्हें नियमित काम मिले और दिहाड़ी सुचारू रूप से जारी रहे.
2010 से लंबित है ईपीएफ और ग्रेच्युटी
मजदूरों की सबसे बड़ी पीड़ा उनका रुका हुआ पैसा है. मिल में कार्यरत और सेवानिवृत्त मजदूरों का ईपीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान साल 2010 से ही लंबित है. स्थिति इतनी दयनीय है कि पिछले 16 वर्षों से अपने हक की गाढ़ी कमाई की राह देखते-देखते कई मजदूर इस दुनिया से भी चल बसे, लेकिन प्रबंधन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. मजदूरों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि विभिन्न मजदूर संगठन और यूनियनें सिर्फ प्रबंधन के इशारे पर अपनी तरफदारी में लगी हुई हैं. किसी भी संगठन ने मजदूरों के हक के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की, जिसके कारण आज भी मजदूरों के हाथ खाली हैं.
सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति में हुआ आयोजन
इस उद्घाटन के मौके पर मिल परिसर में लाल बाबू राय, शंकर राय, देवेंद्र पासवान, मुन्ना पासवान, रंजीत पासवान, राम सुंदर महतो, राजकुमार राय, पालन पासवान, प्रमोद राय, राजेश कुमार, सुरेंद्र राय, सुदामा राय, नवीन सिंह, संजय राय, मिथिलेश राय, अर्जुन पासवान, विजय राय, सुजीत पासवान, मनोज राय, रविंद्र सहनी सहित सैकड़ों मजदूर उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान जनरल मैनेजर फ्रांको घोष ने श्रम आयुक्त को गुलदस्ता देकर सम्मानित भी किया, लेकिन इस औपचारिक सम्मान समारोह के पीछे मजदूरों का दर्द और भविष्य की अनिश्चितता साफ देखी जा सकती थी.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
