शिक्षिका के बेटे-बेटी बिहार पुलिस में चयनित:मां के संघर्ष ने दिलाई सफलता
खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित डुमरिया बुजुर्ग गांव की शिक्षिका मीरा कुमारी के लिए यह गर्व का क्षण है। उनके पुत्र शिवम और पुत्री शालू का चयन बिहार पुलिस में हुआ है। इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है, जो मीरा कुमारी के वर्षों के संघर्ष और त्याग का परिणाम है।
मीरा कुमारी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वार्ड सदस्य के रूप में की थी। इसके बाद उन्हें सेविका के पद पर नौकरी मिली। वर्ष 2006 में जब पंचायत शिक्षक नियोजन प्रक्रिया शुरू हुई, तो उन्होंने भी आवेदन किया। उस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलकर नौकरी करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने सामाजिक बाधाओं और तानों के बावजूद अपने हौसले को बनाए रखा।
सफलता के बाद बच्चों को मिठाई खिलाते परिजन।
लगार पंचायत में शिक्षक नियोजन प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन मुखिया राजेंद्र रजक के निधन के बाद, प्रभारधारी मुखिया अविनाश कुमार मिश्र उर्फ मुकेश कुमार मिश्र ने यह जिम्मेदारी संभाली। कई प्रशासनिक अड़चनों और लंबी कागजी प्रक्रिया के बाद, मीरा कुमारी सहित पांच अभ्यर्थियों को नियोजन पत्र प्रदान किया गया। मीरा कुमारी की नियुक्ति मध्य विद्यालय हरिणमार में हुई।
विपरीत परिस्थितियों में कर्तव्य को प्राथमिकता दी
मध्य विद्यालय हरिणमार पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना लगभग आठ किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी। गांव की कच्ची पगडंडियां और रास्ते की कठिनाइयां उनके लिए बड़ी चुनौती थीं। इन सब के बावजूद, उन्होंने अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी और कभी हार नहीं मानी। नौकरी के साथ-साथ, उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया।मीरा कुमारी का यह अथक संघर्ष अब रंग लाया है। उनके पुत्र शिवम और पुत्री शालू दोनों बिहार पुलिस में चयनित होकर परिवार और डुमरिया बुजुर्ग गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। मीरा कुमारी की यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
