मनोर नदी के कटाव से त्रस्त ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा, 300 फीट अस्थायी बांध तैयार किया
मोतिहारी।बगहा अनुमंडल अंतर्गत बगहा दो प्रखंड के जंगली पहाड़ी क्षेत्र में बहने वाली मनोर नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और कटाव ने दरदरी गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं . हर वर्ष बरसात के मौसम में नदी के उफान से गांव का बड़ा हिस्सा कटाव की चपेट में आ जाता है, जिससे खेत, सड़कें और कई बार घरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है . प्रशासनिक स्तर पर स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों को जब लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी, तो इस बार उन्होंने खुद ही मोर्चा संभाल लिया .ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और चंदा एकत्र कर श्रमदान के माध्यम से नदी किनारे करीब 300 फीट लंबा अस्थायी कटावरोधी बांध तैयार कर दिया है . इस सामूहिक प्रयास में गांव के युवा, बुजुर्ग और किसान सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया .ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मनोर नदी का कटाव उनकी आजीविका और आवासीय सुरक्षा के लिए गंभीर संकट बना हुआ है .
कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्थायी तटबंध एवं कटावरोधी कार्य की मांग की गई, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है . इसी उपेक्षा से आहत होकर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर सुरक्षा उपाय शुरू करने का निर्णय लिया .
स्थानीय ग्रामीण मदन प्रसाद, राजू महतो, संजय महतो, कर्णदेव कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि बांध निर्माण के लिए चंदा जुटाकर बांस, रस्सी और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी गई .
इसके बाद सामूहिक श्रमदान से बांध का निर्माण कार्य शुरू किया गया, जो देखते ही देखते लगभग 300 फीट तक पूरा कर लिया गया .ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ एक अस्थायी संरचना नहीं है, बल्कि गांव को बाढ़ और कटाव की विभीषिका से बचाने की एक सामूहिक और संघर्षपूर्ण पहल है . बांध निर्माण कार्य में हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं—कोई मिट्टी भर रहा है तो कोई बांस और रस्सी लगाने में सहयोग कर रहा है .ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द मनोर नदी पर स्थायी तटबंध का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल बरसात में होने वाले कटाव और तबाही से हमेशा के लिए राहत मिल सके .
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
