आंधी और कीड़ों के कहर से 70% तक घटा लीची का उत्पादन,करोड़ो का नुकसान
पटना.इस साल लीची की मिठास फीकी रहने वाली है। बिहार में इस बार लीची का कुल उत्पादन 70 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे 3 हजार करोड़ के इस कारोबार को करीब 2 हजार करोड़ रुपए का घाटा लगने का डर सता रहा है।
लीची के उत्पादन में भारी गिरावट के कारण मुजफ्फरपुर, वैशाली और पश्चिमी चंपारण सहित राज्य के किसान काफी चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि प्रकृति की मार और सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण लीची के उत्पादन पर असर पड़ा है।
मार्च महीने में मंजर आने के दौरान हुई तेज आंधी-बारिश ने शुरुआती नुकसान किया, लेकिन रही-सही कसर ‘स्टिक बग’ नाम के खतरनाक कीड़े ने पूरी कर दी। इस कीड़े के प्रकोप को समय रहते रोका जा सकता था, मगर कृषि विभाग के पास सामूहिक रूप से कीटनाशक छिड़काव की कोई प्रभावी योजना नहीं थी, जिसके कारण बागवानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पिछले साल भी लीची उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
बिहार में लगभग 39 हजार हेक्टेयर भूमि पर लीची के बागान हैं। मुजफ्फरपुर, वैशाली और पश्चिमी चंपारण के अलावा सीवान, गोपालगंज और छपरा में भी लीची की खेती की जा रही है। कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में साल 2023 में 3 लाख 20 हजार टन लीची का उत्पादन हुआ था, जो 2024-25 में घटकर एक लाख 36 हजार टन हो गया है। इस साल एक लाख से भी कम उत्पादन होने की संभावना है।
50 एकड़ में खेती कर रहे मुजफ्फरपुर के मोतिलाल बताते हैं कि 25 हजार पेटी लीची का उत्पादन कर लेते थे। इस साल मुश्किल से 7 हजार पेटी का ही उत्पादन हुआ है। डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। वहीं किसान और व्यापारी नगीना राय बताते हैं कि ठंड के समय अधिक तापमान की वजह से पेड़ में नए पत्ते आ गए और जिन पेड़ में नए पत्ते आ जाते हैं, उनमें फूल नहीं लगते हैं। उनके बगीचे में मुश्किल से 20-25 प्रतिशत ही फल लगे हैं। उनको एक करोड़ रुपए का नुकसान होने की संभावना है।
‘स्टिक बग’ की संख्या तेजी से बढ़ती है : लीची अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विकास दास का कहना है कि ‘स्टिक बग’ नामक कीड़ा का प्रभाव लीची पर देखा जा रहा है। इसका प्रजनन दर अधिक होता है। एक भी कीड़ा जीवित रह जाता है तो यह दो-तीन घंटों में ही 100 से अधिक हो जाते हैं। यही कारण है कि किसानों ने अपने-अपने बाग में छिड़काव किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस साल कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत ही लीची का उत्पादन हुआ है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
