रेलवे स्टेशन पर 21 बच्चों का रेस्क्यू, रांची का रहने वाला मानव तस्कर गिरफ्तार
पटना.मोतिहारी. बापूधाम मोतिहारी आरपीएफ ने ऑपरेशन आहट के तहत जीआरपी ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 21 बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है. वही एक मानव तस्कर भी पकड़ा गया है. रेस्क्यू सभी बच्चें झारखंड के गोंडा, साहेबगंज व बिहार के भागलपुर के रहने वाले है. सभी की उम्र 5 से 13 साल के बीच है. इनमें पांच बालिका व 16 किशोर शामिल है. पकड़ा गया तस्कर फोन्सिस किस्पोटा है. वह झारखंड के रांची जिला के कानीजाड़ी का रहने वाला है. शनिवार की देर रात मानव तस्कर सहित 21 बच्चों को बापूधाम मोतिहारी स्टेशन के प्लेटफॉर्म दो से पकड़ा गया. बापूधाम मोतिहारी पोस्ट कमांडर भरत प्रसाद ने बताया कि सभी किशोर को अवध एक्सप्रेस से मुजफ्फरपुर और वहां से जनसेवा एक्सप्रेस से भागलपुर ले जाने की योजना थी. कहा कि सूचना पर उप निरीक्षक रमेश कुमार, सउनि शैलेन्द्र कुमार सिंह,सउनि राकेश कुमार,महिला आरक्षी प्रीति कुमारी व आरक्षी राम कुमार सिंह सहित चाइल्ड लाइन के सहायक परियोजना पदाधिकारी शिव पूजन कुमार के साथ टीम ने छापेमारी किया. इस दौरान एक व्यक्ति के साथ 21 नाबालिग बालक व बालिकाओं को संदिग्ध अवस्था में बैठे हुए स्टेशन प्लेटफॉर्म से रेक्स्यू किया गया. कहा कि समस्त कार्यवाही का नियमानुसार मोबाइल के माध्यम से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत मौके पर फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करते हुए तलाशी सह जप्ती सूची बनाया गया. वही अभियुक्तों के पास पाये गए सामानों को जप्त किया गया. कहा कि मामले में अग्रतर कार्रवाई के लिए फोंसिस को जीआरपी को सौप दिया गया. वही सभी किशोर व किशोरी को चाइल्ड लाइन को हैंड ओवर किया गया है. इधर मामले में मानव तस्करी के विरूद्ध फोसिंस किस्पोटा के विरूद्ध जीआरपी में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. जिसे रविवार को मेडिकल के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
चांदमारी में संचालित छात्रावास में रहते है बच्चें
आरपीएफ को पुछताछ में रेस्क्यू किशोर व किशोरी ने बताया कि वह पिछले पांच पूर्व उन्हें घर से लाकर चांदमारी स्थित एक होस्टल में रखा गया था. उक्त बच्चो ने यह भी बताया कि पढाई के नाम पर हमलोगों को लाया गया. पुछताछ में कुछ बच्चें को यह भी जानकारी नहीं थी कि उनको यहां पर किस लिए लाया गया है. उक्त सभी बच्चो को ले जाने वाले मानव तस्कर फोंसिस ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उक्त सभी बच्चे मेरे पास रहते है. जबकि आरपीएफ के पुछताछ में फोसिंस ने बच्चों को लाने के बावत जानकारी नहीं दे सका और अपने पास होस्टल में रखने के बावत और किसी विद्यालय में पढाई करने के बावत कोई प्रमाण पत्र भी नहीं दिखाया. जबकि किसी भी बच्चों व बच्चियों के पास कोई भी पहचान पत्र नहीं पाया गया.
छात्रावास में रहते है 32 बच्चें
चांदमारी स्थित एक मकान के छात्रावास बना 32 बच्चों को रखा गया था. इनमें 21 बच्चों का रेस्क्यू हुआ है. प्रथम दृष्ट्या बिना पंजीकृत छात्रावास में बच्चों के रखने की बात सामने आयी है. ऐसे में पूरे प्रकरण को अवैध धर्मांतरण से जुड़ कर देखा जा रहा है. आशंका जताई जा रही है कि चांदमारी मोहल्ले में अभी भी और बच्चे मौजूद हो सकते हैं. बताया जाता है कि स्टेशन से बच्चों के रेस्क्यू और मानव तस्कर के पकड़े जाने की सूचना पर शहर के एक नामी चर्च के फादर भी आरपीएफ मामले की लिपापोती की पैरवी करने पहुंचे थे. लेकिन मामले को लेकर आरपीएफ अड़ गया.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
