पटना एम्स में अब बिना चीर-फाड़ होगापोस्टमार्टम, 30 मिनट में पता चलेगा मौत का कारण
पटना एम्स में अब बिना चीर-फाड़ के शव का पोस्टमार्टम होगा। यहां वर्चुअल ऑटोप्सी (वर्टोप्सी) की शुरुआत की तैयारी है। सीटी स्कैन, एमआरआई और 3डी इमेजिंग की मदद से डॉक्टर शरीर के अंदरूनी हिस्सों का डिजिटल विश्लेषण करेंगे। यह तकनीक दिल्ली और भोपाल एम्स के बाद अब पटना में लागू होने जा रही है। इससे फॉरेंसिक जांच का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।
खास बात यह है कि जांच का पूरा डाटा सुरक्षित रहेगा, जिसे कोर्ट में पेश किया जा सकता है। वर्षों बाद भी दोबारा विश्लेषण संभव होगा। संक्रमण का खतरा भी बेहद कम होगा, जिससे डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी।
वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया
शव को विशेष बैग में रखकर स्कैनिंग मशीन से गुजारा जाता है।
सीटी स्कैन : हड्डियों के फ्रैक्चर, शरीर में फंसी गोली या एयर एंबोलिज्म की सटीक पहचान करता है।
एमआरआई : नसों और सॉफ्ट टिश्यू की गहराई से जांच करता है।
3डी मॉडल : शरीर का डिजिटल नक्शा तैयार होता है, जिससे डॉक्टर हर एंगल से आंतरिक चोटों को देख सकते हैं।
ये फायदे होंगे
पारंपरिक पोस्टमार्टम में 2-4 घंटे लगते हैं। वर्चुअल तकनीक में अधिकतम 30 मिनट।
चीर-फाड़ की जरूरत नहीं। पूरी प्रक्रिया नॉन-इनवेसिव।
डिजिटल डाटा वर्षा तक सुरक्षित रहेगा। दोबारा जांच आसान।
मानवीय त्रुटि की गुंजाइश कम। सटीकता ज्यादा।
जटिल केस सुलझेंगे : पटना एम्स अब तक 1500 से ज्यादा पारंपरिक पोस्टमार्टम कर चुका है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के नए भवन में हाइटेक फॉरेंसिक यूनिट शुरू होने से न केवल बिहार, बल्कि झारखंड और नेपाल तक के जटिल केस सुलझाए जा सकेंगे। -डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक, पटना एम्स
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
