50 करोड़ की संपत्ति, 50 सवाल:साक्ष्य दिखाए तो पानी पीने लगे निलंबित थानेदार
पटना किशनगंज के निलंबित थानेदार अभिषेक रंजन से बुधवार को ईओयू (EOU) कार्यालय में 6 घंटे पूछताछ हुई। ईओयू की टीम ने उनकी 50 करोड़ की अवैध चल-अचल संपत्ति के संबंध में 50 सवाल पूछे। कई सवालों का गोलमोल जवाब देने पर टीम ने साक्ष्य सामने रखे तो अभिषेक पानी पीने लगे।
उनके साले और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियों के दस्तावेज टेबल पर रखकर पूछा— इसके लिए रकम कहां से लाए थे? इस पर अभिषेक ने कहा— “पारिवारिक बचत और उनकी पुश्तैनी संपत्तियों का हिस्सा है। साले और रिश्तेदारों की संपत्तियों से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।”इससे पहले ईओयू ने 20 अप्रैल को बुलाया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे। 14 अप्रैल को अभिषेक के पटना के रामकृष्णानगर स्थित घर, किशनगंज स्थित सरकारी आवास, सरकारी कार्यालय, सारण स्थित पैतृक आवास और सारण में उमानगर स्थित आवास में छापेमारी हुई थी। उन पर ईओयू ने 1.70 करोड़ का डीए (DA) केस दर्ज किया था।
17 साल की नौकरी
अभिषेक सारण के भेल्दी थाने के पैगा गांव के रहने वाले हैं। 2009 में दरोगा बने और 2023 में इंस्पेक्टर। मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण के अलावा पटना के एसकेपुरी और रामकृष्णानगर थाने में भी दरोगा रहे। 17 साल की नौकरी में जहां भी रहे, जमकर काली कमाई की।करोड़ों की संपत्ति: किशनगंज, पटना और बंगाल में उनके पास 50 करोड़ की चल-अचल संपत्ति है। पैतृक आवास को बनाने में 50 लाख खर्च किए। रामकृष्णानगर में आलीशान मकान बनाने में 2 करोड़ खर्च किए। उनके पास 7 ट्रक भी हैं।
कमाई का जरिया: शराब, जमीन और मादक पदार्थों के तस्करों से कनेक्शन।
तीखे सवाल : गोलमोल जवाब
सवाल: रामकृष्णानगर में दो करोड़ का मकान कैसे बनाया? रकम कहां से लाए?
जवाब: जमीन मैंने पहले ली थी। परिवार से मदद और बैंक से लोन लेकर मकान बनाया।
सवाल: कमाई और संपत्तियों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
जवाब: संपत्तियां परिजनों के नाम पर हैं। उनका मेरी कमाई से लेना-देना नहीं है।
सवाल: साले और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर जमीन-फ्लैट खरीदने के लिए पैसे कहां से आए?
जवाब: यह पारिवारिक बचत और पुश्तैनी संपत्तियों का हिस्सा है।
सवाल: लग्जरी लाइफ और महंगी गाड़ियों का स्रोत क्या है?
जवाब: संपत्तियों को उपहार या पुराने निवेशों से खरीदा था।
सवाल: शराब माफियाओं से संबंध और वसूली के आरोपों पर क्या कहेंगे?
जवाब: यह साजिश है। ऐसा कोई संबंध नहीं है।
सवाल: किशनगंज नगर थानेदार पद पर किसने पोस्टिंग कराई?
जवाब: किशनगंज के तत्कालीन एसडीपीओ गौतम कुमार ने।
सवाल: गौतम से 50 बार से अधिक बात क्यों होती थी?
जवाब: वह अफसर हैं। उन्हें मुझ पर भरोसा था। मैं भी उनसे आदेश लेता था। इसलिए बात होती थी।
जवाब और जब्त दस्तावेजों का मिलान होगा: ईओयू ने सवाल-जवाब की वीडियोग्राफी करने के साथ कलमबंद भी किया है। अब उनके जवाबों का मिलान जब्त दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट से किया जाएगा।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
