बिहार सरकार 12 हजार करोड़ लोन लेगी:1 करोड़ को मिलेगी रुकी पेंशन
पटना.बिहार की नई सरकार ने राज्य को आर्थिक दवाव से उबारने के लिए रिजर्व बैंक से जून तक 12 हजार करोड़ रुपये के लोन की मांग की है। इसमें से 4 हजार करोड़ रुपये इसी महीने के अंत तक मिल सकते हैं।
इधर, CM सम्राट चौधरी कुर्सी संभालने के 6 दिन बाद मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। आज यानी बुधवार को वे दिल्ली से पटना लौटेंगे। यहां अधिकारियों के साथ विभागों की समीक्षा बैठक करेंगे।CM ने प्रधानमंत्री से मिलने के बाद X पर लिखा- राज्य के समग्र विकास और जनकल्याण के विषय पर मार्गदर्शन मिला। प्रधानमंत्री जी का स्नेह और सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।
PM से मिलने के बाद सम्राट RSS दफ्तर भी पहुंचे। यहां उन्होंने संघ नेताओं से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री से मिलने के पहले सम्राट चौधरी BJP हेडक्वार्टर में नितिन नवीन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 5 मिनट चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि यहां मंत्रिमंडल में नामों की लिस्ट फाइनल की गई।
1 करोड़ को मिलेगी रुकी पेंशन
इधर, नई सरकार क्राइसिस मैनेजमेंट मोड में है, 12 हजार करोड़ के लोन का सबसे बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के मद में जाएगा। मार्च और अप्रैल महीने की पेंशन अटकी हुई है। सरकार की योजना है कि मई में 1 करोड़ से अधिक बुजुगों, दिव्यांगों और विधवाओं को दो महीने की पेंशन एक साथ दी जाए।
इसके अलावा फंड की कमी से रुकी हुई विकास योजनाएं और 58 हजार छात्रों के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का भुगतान भी इसी कर्ज से होने की उम्मीद है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी थी। इससे सरकार पर हर महीने 1150 करोड़ रुपये का बोझ पड़ रहा है। साथ ही महिला रोजगार योजना में 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होने से खजाना दबाव में आ गया।
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सामाजिक सुरक्षा पेंशन कब तक? जवाब: लोन की पहली किस्त अप्रैल अंत तक मिलने की उम्मीद है। मई में मार्च-अप्रैल का पैसा एक साथ खाते में आएगा।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का क्या होगा? जवाब: 58 हजार छात्रों की फीस अटकी है। शिक्षा वित्त निगम मई से भुगतान शुरू करने की तैयारी में है।
सड़कों-पुलों का काम कब शुरू? जवाब: ट्रेजरी से भुगतान रुकने से प्रोजेक्ट ठप हैं। लोन मिलते ही निर्माण कार्यों के लिए फंड जारी होगा।
बिहार पर कुल कितना कर्ज है? जवाब: राज्य की देनदारी 3.70 लाख करोड़ पार कर चुकी है। इस साल के अंत तक यह 4 लाख करोड़ के पार जा सकती है।
4 लाख करोड़ के पार जाएगा बोझ
बिहार सरकार ने 2025 के अप्रैल-जून की तिमाही में भी 12 हजार करोड़ लोन लिया था। लेकिन, उस समय लोन लेना मई महीने से शुरू किया गया था, जबकि नए वित्तीय वर्ष के शुरू होते ही वेतन में देरी होने लगी और अप्रैल से ही लोन की जरूरत पड़ने लगी है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो सरकार की शुद्ध देनदारी 3 लाख 70 हजार करोड़ के पार जा चुकी है। 2026 समाप्त होने तक यह 4 लाख करोड़ के पार पहुंच जाएगा।
सरकार को इस साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चुकाने हैं। यानी हर दिन 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सिर्फ सूद भरने में जा रही है। वित्त विभाग भले ही इसे एफआरबीएम सीमा के भीतर बता रहा हो, लेकिन वित्तीय वर्ष के पहले महीने से ही वेतन में देरी होना, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का पैसा रोक देना बताता है कि लोकलुभावन योजनाओं ने विकास कार्यों के बजट में सेंध लगा दी है। इससे उबरने के लिए सरकार को गंभीर पहल की जरूरत है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
