डीआरडीए निदेशक ने 13 साल की नौकरी में 10 करोड़ की संपत्ति बनाई
पटना.सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार की चल-अचल संपत्ति की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। ईओयू को पता चला है कि 2013 में वैभव बीडीओ बने। उससे पहले बैंक की नौकरी में थे। उनके खाते में केवल 10 हजार रुपए थे। मुजफ्फरपुर के मिश्र मनियारी गांव में पुश्तैनी मकान बनाने के लिए उनके पिता ने लोन लिया।
बीडीओ बनने के बाद वैभव ने लोन चुकाया। 13 साल की नौकरी में वैभव ने काली कमाई से 10 करोड़ की संपत्ति बनाई। मुजफ्फरपुर और पटना में 16 प्लॉट खरीदे। अपनी प|ी बैंककर्मी नेहा नंदिनी के नाम से फुलवारीशरीफ में दो प्लॉट खरीदे। वैभव ने खुद के नाम से एक प्लॉट मुजफ्फरपुर में 2016 में खरीदा।
बैंक लॉकर खोला जाएगा : मुजफ्फरपुर के एसबीआई में वैभव कुमार का लॉकर है। दो-तीन दिन में ईओयू उनको वहां लेकर जाएगी और सामने ही लॉकर खोला जाएगा। ईओयू वैभव से 8 अप्रैल को एक बार पूछताछ कर चुकी है। दोबारा पटना में बुलाकर पूछताछ करेगी। पहले राउंड में चार घंटे की पूछताछ में उन्होंने ठोस जवाब नहीं दिए थे।
टेंडर के बदले ठेकेदारों से मोटी कमीशन ईओयू की जांच से पता चला है कि वैभव टेंडर के बदले ठेकेदारों से मोटी कमीशन लेते थे। पोस्टिंग वाले इलाकों में उन्होंने खूब कमाई की। वैभव दलालों के जरिए चहेते ठेकेदारों को टेंडर दिलाते थे। दलालों की मदद से अपनी काली कमाई निवेश की। इस काम में वैभव के नीचे काम करने वाले कई सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। अब जांच एजेंसी इनकी पूरी चेन बना रही है। जो भी कर्मचारी और दलाल जांच के दायरे में आएंगे, उनसे पूछताछ करेगी।
ईओयू ने वैभव कुमार का पैन कार्ड जब्त किया
पैन कार्ड जब्त, फाइनेंशियल ट्रेल की हो रही जांच ईओयू ने वैभव कुमार का पैन कार्ड जब्त किया है। इसके आधार पर फाइनेंशियल ट्रेल की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट से संपर्क किया है। उसे वैभव के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी दी। ईओयू को शक है कि वैभव ने काली कमाई के पैसे सफेद करने और संपत्तियों को खरीदने के लिए मनी लांड्रिंग का इस्तेमाल किया है। इस एंगल से भी जांच की जा रही है। यह मामला ईडी को भेजा जाएगा। उसके बाद पीएमएलए के तहत नई एफआईआर ईडी दर्ज करेगी।
दूर-दराज के इलाके में कमीशन अधिक, इसलिए वहीं कराई पोस्टिंग
वैभव कुमार की पहली पोस्टिंग सीतामढ़ी के परिहार ब्लॉक में हुई थी। कम समय में अधिक रुपए कमाने के लिए उन्होंने ग्रामीण इलाकों के विकास से जुड़े टेंडर दिलाने के बदले ठेकेदारों से 2 से 5% कमीशन लिया। सूत्रों के अनुसार, वैभव ने अपनी पोस्टिंग दूर-दराज के इलाकों में कराई। क्योंकि, वहां कमीशन अधिक मिलता था। इनकी पोस्टिंग सीतामढ़ी, छपरा, भोजपुर, समस्तीपुर और सहरसा में रही थी।
परिजनों के नाम 16 प्रॉपर्टी खरीदी
वैभव कुमार ने 16 प्रॉपर्टी खरीदी। सिर्फ एक खुद के नाम पर ली। दो प्रॉपर्टी बेटे ऐश्वर्य भास्कर, 6 प्रॉपर्टी पिता ललित नारायण झा के नाम पर खरीदी। सबसे अधिक 7 प्रॉपर्टी प|ी नेहा नंदिनी के नाम ली। वैभव की सबसे महंगी जमीन 1.30 करोड़ रुपए की है। इसे अक्टूबर 2025 में नेहा नंदिनी के नाम पर खरीदा गया। इसके लिए नेहा ने 68 लाख रुपए बैंक से लोन लिया है। 2017 में पिता और पत्नी के नाम से 5 तो 2022 में 4 प्रॉपर्टी खरीदी।
बेटे के नाम पर आईटीआई खोला
वैभव का बेटा ऐश्वर्य भास्कर 9 साल का है। उन्होंने बेटे के नाम पर मुजफ्फरपुर में एनएच-28 किनारे जमीन खरीदी। साथ ही एक बीघा जमीन लीज पर ली। फिर बेटे के नाम से ही आईटीआई संस्थान खोला। इसमें डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए। इसे चलाने की जिम्मेदारी सगे बेरोजगार भाई ज्योर्तिमय को दी। ईआेयू ने इसकी जांच शुरू कर दी है। श्रम संसाधन विभाग से ईआेयू ने रिपोर्ट मांगी है कि युवाओं को कौशल विकास के लिए दी जाने वाली ट्रेनिंग के लिए यहां किस तरह के इंतजाम थे? इस संस्थान में अब तक कितने स्टूडेंट्स का एडमिशन हुआ था?
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
