रसोई गैस की किल्लत:स्कूलों में नहीं पहुंच रहा रसोई गैस,मिड-डे-मील के लिए लकड़ी बना सहारा
समस्तीपुर.जिले में रसोई गैस की किल्लत लगातार गहराती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि जगह-जगह उपभोक्ता गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतार में खड़े होकर सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे लोगों की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इस बीच कई उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले से गैस बुक कर रखी है और उनके पास डीएसी नंबर भी मौजूद है, लेकिन एजेंसी की ओर से बिना सिलेंडर दिए ही डिलीवरी दिखाकर ऑर्डर को क्लोज कर दिया गया।
इससे उपभोक्ता हैरान और परेशान हैं कि आखिर बिना गैस दिए डिलीवरी कैसे दिखा दी गई। इस मामले में जिले की कई गैस एजेंसियों का नाम सामने आ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब एजेंसी से संपर्क किया जाता है तो सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन गैस की डिलीवरी नहीं हो रही है। कई एजेंसियों के फोन नंबर लगातार नहीं लग रहे हैं। वहीं इसी बीच केवाईसी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि गैस की कमी के बीच एजेंसियों की लापरवाही और कथित फर्जीवाड़ा स्थिति को और गंभीर बना रहा है। गैस संकट का असर अब स्कूलों तक पहुंच गया है।
विद्यालयों का कहना है कि मिड डे मील के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जाता है, लेकिन फिलहाल इसकी आपूर्ति बंद हो गई है। ऐसे में बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए मजबूरी में जलावन यानी लकड़ी के सहारे खाना बनाया जा रहा है। मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुमीत कुमार सौरभ ने बताया कि करीब 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने गैस नहीं मिलने के कारण लकड़ी से भोजन बनाने की सूचना दी है। आपात स्थिति में लकड़ी पर भोजन बनाने का प्रावधान है।
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