मार्च में चलने लगेंगे AC–अप्रैल में लू:10 मार्च को हो सकती है बारिश
पटना.बिहार में मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी पड़ने लगी है। बीते 24 घंटे के दौरान राज्य का मौसम शुष्क बना रहा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले एक सप्ताह के दौरान ऐसी ही स्थिति बनी रह सकती है। मौसम शुष्क रहेगा। चिलचिलाती धूप के चलते दोपहर में बाहर निकलना मुश्किल होगा।
पिछले 24 घंटे में राज्य का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बांका में 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना, मुजफ्फरपुर, गया समेत राज्य के अन्य शहरों में गर्मी ज्यादा महसूस हो रही है। ग्रामीण इलाकों में रात से सुबह तक हल्की ठंडक है।
सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.3 डिग्री सेल्सियस औरंगाबाद में दर्ज किया गया। राज्य का न्यूनतम तापमान 13.3 से 19.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मौसम विभाग के अनुसार इस साल लू वाले दिनों की संख्या ज्यादा रह सकती है। मई के बदले अप्रैल से ही लू चलने की आशंका है।
अगले एक सप्ताह में बिहार का मौसम कैसा रहेगा? इस साल गर्मी कितनी पड़ेगी? मानसून कैसा रहेगा? पढ़ें रिपोर्ट…।
अगले 6 दिनों तक शुष्क बना रहेगा मौसम, इसके बाद होगी बारिश
IMD के अनुसार अगले 6 दिनों तक बिहार में मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके बाद सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिले में एक या दो स्थानों पर बारिश हो सकती है।
अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों के अधिकतम तापमान में 1-3°C की वृद्धि होगी। वहीं, अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों के न्यूनतम तापमान में 2-4°C की वृद्धि होगी। एक सप्ताह में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर पहुंच सकता है।IMD ने 5 मार्च से 9 मार्च 2026 तक के लिए राज्य के किसी भी जिले के लिए मौसम संबंधी कोई चेतावनी जारी नहीं की है। 10 मार्च को सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में एक या दो स्थानों पर बारिश होने और बिजली गिरने की संभावना है। हवा की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
क्या है बिहार से जुड़ी मौसम प्रणाली?
वेस्टर्न डिस्टरबेंस मिडिल लेवल ट्रोपोस्फेरिक वेस्टरलीज में एक ट्रफ के तौर पर बना हुआ है। इसका एक्सिस समुद्र तल से 5.8 km ऊपर है।
साउथ असम और आस-पास के इलाकों में समुद्र तल से 0.9 km ऊपर अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल के गंगा के उत्तर के इलाके और उससे सटे बांग्लादेश के ऊपर समुद्र तल से 0.9 km ऊपर एक अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है।
सबट्रॉपिकल वेस्टली जेट स्ट्रीम समुद्र तल से 12.6 km ऊपर उत्तर पश्चिम भारत में बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्से और उससे सटे इक्वेटोरियल हिंद महासागर के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। यह समुद्र तल से 1.5 km ऊपर है।
एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 6 मार्च 2026 से वेस्टर्न हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
दिख रहा ग्लोबल वार्मिंग का असर
मौसम में आए बदलाव को लेकर हमने पटना मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर आनंद शंकर से बात की। उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह तक बारिश नहीं होगी। तापमान में इजाफा होगा। मार्च में ही तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है। यह सब ग्लोबल वार्मिंग का असर है। पिछले वर्ष की तुलना में तापमान बढ़ने की आशंका है।
15 साल का ट्रेंड: समय से पहले जा रही है ठंड
पिछले 15 वर्षों के तापमान पर नजर डालें तो बिहार का वार्षिक औसत सतही वायु तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहता है। मार्च 2025 में बिहार में गर्मी ने 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
फरवरी 2026 में अधिकतम तापमान 31.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। तापमान का 30 डिग्री से ऊपर होना साफ संकेत है कि ठंड जल्द जा रही है और गर्मी की शुरुआत पहले हो रही है। सुबह और शाम में थोड़ी ठंड महसूस हो रही है, लेकिन दिन में धूप और गर्मी ज्यादा है।
अप्रैल-जून में हीटवेव, जल संकट का खतरा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, अप्रैल और जून माह के बीच तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। हीटवेव का समय बढ़ा हुआ रहेगा। पिछले साल जिस तरह की गर्मी और तापमान रहा, उससे साफ है कि बिहार के कई इलाकों में गर्मी के समय तापमान 40 डिग्री से ऊपर होने की आशंका है। पिछले कुछ सालों के ट्रेंड से भी यही अनुमान लगाया जा रहा है।
हीटवेव (लू) वाले दिन बढ़ सकते हैं। इसका असर यह होगा कि लोगों की सेहत और कृषि दोनों प्रभावित होगी। पानी की जरूरत बढ़ेगी। जल संकट का खतरा होगा। दक्षिण बिहार के इलाकों में वाटर लेवल ज्यादा प्रभावित होगा।
2026 में बिगड़ सकता है मानसून का मिजाज
2026 में मानसून का मिजाज बिगड़ सकता है। समुद्र में हो रहे बदलाव बारिश का गणित गड़बड़ा सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक संभावना है कि 2026 में बिहार को दोहरी मार झेलनी पड़े। उत्तर बिहार में ज्यादा बारिश से बाढ़ का खतरा है तो दक्षिण बिहार में कम बारिश से सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के शुरुआती संकेत बताते हैं कि इस बार देश में बारिश बराबर नहीं बंटेगी। इसका असर बिहार जैसे संवेदनशील राज्य पर ज्यादा दिख सकता है।
ला नीना की विदाई, हिंद महासागर तटस्थ
पुणे स्थित जलवायु अनुसंधान और सेवाएं प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. डीएस पई ने बताया कि मौजूदा ला नीना फरवरी से अप्रैल के बीच कमजोर होकर न्यूट्रल स्थिति में जा सकती है।
मानसून की शुरुआत ऐसे तटस्थ हालात में होती है तो बारिश का बंटवारा असमान रहता है। कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम बारिश होती है। हिंद महासागर भी अभी तटस्थ स्थिति में है। अगर यह सकारात्मक चरण में नहीं गया तो मानसून को ताकत नहीं मिलेगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
