Begusarai

बेगूसराय में दिखा मिनी वृंदावन सा नजारा:फूलों की होली में झूम उठे लोग

बेगूसराय की गलियां आज गुलाल से नहीं, बल्कि ताजे फूलों की खुशबू और पंखुड़ियों की बारिश से सराबोर रही। शहर के डॉ. एमएन रॉय गली स्थित श्री राधा कुंज बिहारी मठ (हरे कृष्णा सेंटर) में आयोजित गौर पूर्णिमा और फ्लावर होली महोत्सव ने एक नया इतिहास रच दिया। बेगूसराय में पहली बार हुए इस अनूठे प्रयोग ने न केवल श्रद्धालुओं का दिल जीता, बल्कि भक्ति के एक नए स्वरूप से शहर को परिचित कराया।

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शाम 6:00 बजे जैसे ही शंखनाद हुआ, पूरा परिसर हरे कृष्णा के महामंत्र से गूंज उठा। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि बेगूसराय की जनता आध्यात्मिक उत्सवों के लिए कितनी उत्साहित है। आमतौर पर होली का नाम आते ही जेहन में रंगों और गुलाल की तस्वीर उभरती है, लेकिन राधा कुंज बिहारी मठ ने इसे सात्विक होली का रूप दिया.कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के विग्रहों के भव्य श्रृंगार के साथ हुई। आयोजन के लिए गेंदा, गुलाब, मोगरा और गेंदे की विभिन्न किस्मों के क्विंटल फूलों का इंतजाम किया गया था। सबसे पहले पुजारियों ने विग्रहों पर फूलों की वर्षा की, जिसके बाद पूरे पंडाल में उपस्थित भक्तों पर फूलों की बौछार शुरू हुई। देखते ही देखते पूरा फर्श फूलों की चादर से ढंक गया। लोग मस्ती में झूम उठे।

 

बेहद खास अंदाज में कार्यक्रम का शुभारंभ

 

कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद खास अंदाज में हुआ। सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के विग्रहों को रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों से होली खिलाई गई। इसके बाद अभिषेक की रस्म पूरी हुई। जैसे ही मंदिर के पुजारियों ने भगवान पर फूलों की वर्षा शुरू की, पूरा वातावरण दिव्य खुशबू से महक उठा। भगवान को अर्पित किए गए इन्हीं फूलों को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं पर बरसाया गया, जिससे भक्त भाव-विभोर हो उठे।

 

 

हरे कृष्णा सेंटर में स्थापित प्रतिमा।

आयोजन केवल होली तक सीमित नहीं था। यह गौर पूर्णिमा का पावन अवसर था, जिसे गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय में भगवान चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। वक्ताओं ने चैतन्य महाप्रभु के जीवन और उनकी ओर से प्रचारित संकीर्तन आंदोलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे प्रेम और भक्ति के माध्यम से ईश्वर को हासिल किया जा सकता है। इस दौरान पंचामृत और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का अभिषेक किया गया।

 

पारंपरिक मृदंग और झांझ की थाप पर जब एस्थेटिक कीर्तन शुरू हुआ, तो पंडाल में एक अलग ही ऊर्जा का संचार हुआ। कॉलेज जाने वाले युवाओं की टोली भी हरे कृष्णा के धुन पर झूमती नजर आई। क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग, हर कोई अपने आराध्य की मस्ती में सराबोर होकर नृत्य कर रहा था। यह नजारा किसी अंतरराष्ट्रीय इस्कॉन सेंटर जैसा भव्य प्रतीत हो रहा था। लोगों ने कहा कभी नहीं सोचा था कि बेगूसराय में भी वृंदावन जैसी होली देखने को मिलेगी।

 

 

श्रद्धालु झूमते नजर आए हैं।

फूलों की होली महज एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरी है। स्थानीय रवि प्रकाश ने बताया कि हमने टीवी पर मथुरा और वृंदावन की फूलों वाली होली देखी थी, लेकिन आज अपने ही शहर में उसे महसूस करना गौरव की बात है। बिना किसी केमिकल वाले रंगों के, सिर्फ फूलों से होली खेलना पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा संदेश है।फूलों की होली सात्विकता का प्रतीक है। इसमें न त्वचा को नुकसान है, न पर्यावरण को। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक कोमल माध्यम है। फूलों की होली ने संदेश दिया कि उत्सव केवल शोर-शराबे का नाम नहीं, बल्कि आंतरिक आनंद और प्रकृति के सम्मान का नाम है।

 

फूलों की होली न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह मन को शांति और सात्विक प्रसन्नता भी प्रदान करती है। एक-दूसरे पर फूलों की बारिश करते हुए लोगों ने सामाजिक समरसता और प्रेम का संदेश दिया।

 

 

भगवान के विग्रह ने खेली फूल की होली।

राधा कुंज बिहारी मठ के प्रबंधन ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य बेगूसराय की जनता को चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं और सनातन संस्कृति के आनंदमयी स्वरूप से परिचित कराना था। भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।लोगों ने ब्रज की होली के संबंध में सुना था, लेकिन आज बेगूसराय ने इसे महसूस किया। फूलों की बारिश में भीगना एक अद्भुत अनुभव था। हवा में अबीर-गुलाल की जगह फूलों की खुशबू तैर रही थी।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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