पटना में ही देश का सबसे बड़ा हड्डी का अस्पताल बनेगा
पटना के राजवंशी नगर में बन रहा जय प्रकाश नारायण हड्डी एवं ट्रामा अस्पताल जल्द ही देश का सबसे बड़ा हड्डी अस्पताल होगा। तीन महीने के भीतर यहां 400 बेड की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। छह महीने के अंदर अस्पताल में ब्लड बैंक भी स्थापित किया जाएगा। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने मंगलवार को विधान परिषद में सदस्य कार्तिक कुमार के प्रश्न के जवाब में दिया। उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक स्थापना के लिए कोलकाता से तकनीकी सहमति जरूरी होती है। इस कारण प्रक्रिया लंबी है और इसमें लगभग छह महीने का समय लगेगा।
यहां करीब 220 करोड़ की लागत से छह मंजिला आधुनिक भवन बन रहा है। अस्पताल में हड्डी, ट्रामा और दुर्घटना मरीजों के इलाज की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। यह अस्पताल बिहार ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत के मरीजों के लिए राहत केंद्र बनेगा। राज्य में हर दिन सड़क हादसे, गिरने और कामकाजी दुर्घटनाओं के मामले बढ़ रहे हैं। समय पर ऑपरेशन नहीं होने से कई मरीज स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाते हैं। नए अस्पताल से गोल्डन ऑवर में इलाज संभव होगा। इससे जान और अंग दोनों बचाने में मदद मिलेगी।
38 जिलों में खुलेंगे निजी पारामेडिकल संस्थान
रविंद्र प्रसाद सिंह के प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि बिहार के 38 जिलों में नए निजी पारामेडिकल संस्थान खोले जाएंगे। राज्य में फिलहाल 42 सरकारी और 86 निजी पारामेडिकल संस्थान संचालित हैं, जिनमें 33 हजार से अधिक सीटें हैं।
विधायक-विधान पार्षद को कैशलेस मेडिकल सुविधा
मंगल पांडेय ने सदस्य सैयद फैसल अली के प्रश्न के जवाब में कहा कि विधायक और विधान पार्षद को कैशलेस मेडिकल सुविधा दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों की बैठक होगी।
400 बेड का होगा अस्पताल
मरीजों को सीधा फायदा
दुर्घटना के बाद तुरंत ऑपरेशन और इमरजेंसी इलाज।
गंभीर मरीजों को दूसरे राज्य रेफर करने की जरूरत घटेगी।
सरकारी दर पर महंगे हड्डी ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी।
लंबी प्रतीक्षा सूची और इलाज में देरी कम होगी। स्पोर्ट्स इंज्यूरी मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे।
जांच से सर्जरी तक इलाज एक ही परिसर में संभव हो सकेगा।
आधुनिक सुविधाएं
30 बेड का अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर बन रहा है।
खेल के दौरान लगी गंभीर चोटों का विशेष इलाज उपलब्ध होगा।
छह मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर में जटिल सर्जरी संभव होगी।
सभी जांच एक ही भवन में होंगे। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे सुविधा।
आधुनिक तकनीक से फ्रैक्चर और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी।
हड्डी की चोट में ‘गोल्डन ऑवर’ क्यों अहम
हादसे के बाद पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर माना जाता है। इसी समय सही इलाज मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ती है। देरी होने पर ज्यादा खून बहने और नस क्षति का खतरा। देर से ऑपरेशन होने पर स्थायी दिव्यांगता का खतरा रहता है। ट्रामा सेंटर की उपलब्धता मौत दर कम करती है। बड़े हड्डी अस्पताल गोल्डन ऑवर इलाज सुनिश्चित करते हैं। यही वजह है कि बड़े शहरों में अलग ट्रामा और ऑर्थोपेडिक सेंटर बनाए जाते हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
