तिलक में जा रहे 3 दोस्तों की मौत:एक की पत्नी प्रेग्नेंट,दोस्तों के साथ बाइक से गए
पटना.गयाजी.“मेरे पति बस में सवार थे। कहा था- रात 3 बजे तक लौट आएंगे, लेकिन रास्ते में क्या हुआ, पता नहीं। बस से उतरकर वो अपने दोस्त प्रताप और सोनू के साथ बाइक पर बैठ गए। रात 11 बजे मौत की खबर आ गई।”
ये कहना है मृतक की पत्नी बबीता कुमारी का, जो 9 महीने की प्रेग्नेंट हैं। इनके पति की मौत उनके दो दोस्तों के साथ हो गई। सभी एक ही बाइक से जा रहे थे। 90 की स्पीड में इनकी बाइक पोल से टकरा गई।
दरअसल, गया के अतरी प्रखंड के रिउला गांव की एक लड़की की शादी थी, जिसके माता-पिता नहीं थे। उसका तिलक लेकर सभी नवादा के अकबरपुर की ओर जा रहे थे, तभी उनकी बाइक बिजली के पोल से टकरा गई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक R15 की परखच्चे उड़ गए। हादसे में सोनू कुमार (23), प्रताप कुमार ( 23) और इंद्र मांझी ( 23) की मौके पर मौत हो गई। सोनू और प्रताप चाचा भतीजा है। इंद्र की पत्नी बबीता 9 महीने की प्रेग्नेंट है।जानिए तीन युवकों की मौत के बाद गांव में मातम है, शादी की खुशियां गम में बदल गईं।
अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपए मुखिया ने दिए
भास्कर के रिपोर्टर मृतकों के गांव पहुंचे। यहां ज्यादातर घर फूस या कच्चे मकान के हैं। तीनों परिवार ईंट भट्ठे या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। इनका कोई स्थायी आय नहीं है।हादसे के बाद कमाने वाला कोई नहीं बचा है। तीनों लड़के बाहर जाकर मेहनत करते थे। घर उन्हीं से चलता था। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय मुखिया ने अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपए दिए हैं।
परिजनों ने की मुआवजे की राशि की मांग
परिवार का कहना है कि कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत 20-20 हजार रुपये मिलने चाहिए थी। लेकिन, रविवार शाम तक किसी परिवार को राशि नहीं मिली।मृतक इंद्र की पत्नी बबीता बताती है कि तीनों बाइक से जा रहे थे, रास्ते में एक तीखा मोड़ आया। बाइक बेकाबू हुई और सीधे बिजली के खंभे से टकरा गई। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई।सबसे मार्मिक दृश्य इंद्र मांझी के घर के बाहर दिखी। उनका शव घर के सामने रखा है। रविवार को अंतिम संस्कार नहीं हुआ। वजह उनकी मां कोलकाता में ईंट भट्ठे पर काम करती हैं। परिवार उनके आने का इंतजार कर रहा है।
इंद्र आठ दिन पहले ही चेन्नई से गांव लौटे थे, जहां वे मजदूरी करते थे। अब उनके पीछे गर्भवती पत्नी बबीता रह गईं है। तीन छोटे बच्चे है। बबीता बार-बार एक ही बात कहती हैं कि अब पहाड़ जैसी जिंदगी कैसे कटेगी।
सोनू गया तो घर का सहारा भी चला गया
मृतक सोनू चौधरी अपने घर के इकलौते कमाने वाले थे। पिता सुनील चौधरी दिव्यांग हैं। मां लंबे समय से बीमार हैं। पिता सुनील कहते हैं कि अब दवा का खर्च कैसे चलेगा और ये घर कैसे चलेगा।मृतक प्रताप की बड़ी बहन प्रिया रोते हुए बताती हैं कि वह कहता था, मजदूरी करके छोटी बहन की शादी कराएगा। पैसा जोड़ रहा था। हम 2 बहन है। अब छोटी बहन की शादी कौन कराएगा। वो ईंट भट्ठे पर काम करता था। घर का वही एक सहारा था। मां बेटे की मौत के बाद बार-बार बेहोश हो रही हैं।
ग्रामीण अखिलेश कुमार कहते हैं कि अगर बस से चले जाते, तो आज जिंदा होते। एक गर्भवती पत्नी का सहारा चला गया। एक विकलांग पिता बेसहारा हो गया। एक बहन की शादी अधूरी रह गई। बस से जाते तो तीनों जिंदा होते। रफ्तार ने सब कुछ छीन लिया।मृतक प्रताप कुमार के जीजा हरे राम चौधरी ने बताया, “छोटू चौधरी की बेटी के तिलक समारोह में शामिल होने के लिए तीनों युवक अकबरपुर प्रखंड के महोगया गांव जा रहे थे। एक ही गाड़ी पर चाचा इंद्र मांझी-भतीजा प्रताप और गांव का एक युवक सवार था। तीनों के कार्यक्रम स्थल पहुंचने से पहले ही कटघर मोड़ के पास उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई।”
नवादा पुलिस ने दी परिजनों को सूचना
नवादा के सीतामढ़ी थाना प्रभारी पप्पू शर्मा ने बताया कि सबसे पहले आपातकालीन सेवा 112 को सूचना मिली थी कि 3 लोगों की मौत हो गई है। तुरंत इसकी जानकारी हम लोगों को मिली।मृतकों का शव जमीन पर गिरा था और सभी लोगों की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद परिवार को हम लोगों ने सूचना दी और सभी लोगों का पोस्टमार्टम करवा कर परिवार के हवाले मृतक के शव को सौंप दिया।सभी एक ही गांव के रहने वाले थे। सभी लोग तिलक समारोह में जा रहे थे, तभी यह घटना घटी है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
