बिजली महंगी करने के प्रस्ताव पर उपभोक्ता बोले-कंपनी मुनाफे में, दर तो घटनी चाहिए
पटना.बिजली महंगी होगी या नहीं, इस पर गुरुवार को फैसला हो गया, लेकिन अभी रिजर्व रखा गया है। मार्च में फैसला सुनाया जाएगा, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। बिजली कंपनी के प्रस्ताव पर गुरुवार को अंतिम जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने दर बढ़ाने का विरोध किया। बिहार विद्युत विनियामक आयोग अध्यक्ष आमिर सुबहानी, सदस्य परशुराम सिंह यादव और सदस्य अरुण कुमार सिन्हा ने आमलोगों और बिजली कंपनी का पक्ष सुना। उपभोक्ताओं ने कहा-जब कंपनी तीन साल से मुनाफा में है तो दर बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों? बढ़ाने की जगह घटानी चाहिए। वैशाली विद्युत उपभोक्ता संघ के प्रमोद कुमार ने कहा-आयोग बिजली की खरीद, ट्रांसमिशन शुल्क, लॉस आदि की गहनता से जांच के बाद फैसला ले। खगड़िया के बलहा-मानसी निवासी संतोष कुमार ने नगर पंचायत से नगर परिषद में शामिल दुकानों की श्रेणी बदलने के बजाय लगाए जाने वाले जुर्माना को वापस लेने की मांग की।
क्या बोले उपभोक्ता : गोविंद कुमार ने कहा-देश में सभी जगह मशरूम उत्पादन करने वाले लोगों को कृषि श्रेणी का कनेक्शन मिल रहा है। लेकिन, बिहार में श्रेणी का फैसला नहीं होने से कृषि आधारित उद्योग नहीं लग रहे हैं। तारकेश्वर प्रसाद ने कहा-समस्तीपुर, सीतामढ़ी, वैशाली आदि जिलों में किसान मशरूम समेत कृषि आधारित छोटे उद्योग लगाना चाहते हैं, लेकिन कृषि श्रेणी का कनेक्शन नहीं मिल रहा है। अनिल कमल ने कहा-छोटे उद्योग चलाकर जीविकापार्जन करने वालों को बिजली कंपनी द्वारा भारी जुर्माना लगाए जाने से उद्योग बंद हो रहे हैं। राघोपुर दियारा के चंद्रमा जीत प्रसाद ने कहा-खेत चार महीना बाढ़ में डूबे रहते हैं, लेकिन बिजली कंपनी किसानों को 1000 रुपए प्रति महीने बिल भेजती है। दिव्यांशु ने कहा-बिहार में ईवी को चार्ज करने के लिए कोई श्रेणी नहीं है। महाराष्ट्र समेत अन्य कई राज्यों में श्रेणी बनाई गई है।
बंगाल-झारखंड बॉर्डर पर शिफ्ट हो रहे उद्योग
बिहार गैस मैन्युफेक्चर एसोसिएशन के ओपी सिंह ने कहा कि बिहार में बिजली की दर पश्चिम बंगाल और झारखंड से ज्यादा है। इसके साथ ही फिक्स चार्ज पश्चिम बंगाल की तुलना में पांच गुना और झारखंड से दोगुना है। इस कारण बिहार के लोग अपना उद्योग झारखंड और पश्चिम बंगाल के बॉर्डर इलाके में लगा रहे हैं। कंपनियां सरप्लस बिजली को सरेंडर करने के बजाय उद्योग को सस्ती दर पर नहीं दे रही है। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के एकेपी सिन्हा ने उद्योग के लिए गारंटेड बिजली देने की मांग की।
एक स्लैब होने पर प्रभाव
स्लैब एक होने के बाद शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली सस्ती होगी। अभी पहला स्लैब 7.42 रुपए प्रति यूनिट और दूसरा स्लैब 8.95 रुपए प्रति यूनिट है। इसको एक स्लैब कर दर को 7.77 रुपए रखा है। इस हिसाब से 125 यूनिट मुफ्त बिजली की खपत करने के बाद शेष यूनिट पर 1.18 रुपए प्रति यूनिट दर घटेगा।
शहरी व्यावसायिक उपभोक्ताओं का पहला स्लैब 7.73 रुपए प्रति यूनिट और दूसरा स्लैब 8.93 रुपए प्रति यूनिट है। इसको एक स्लैब कर दर 8.08 रुपए प्रति यूनिट रखा है। इस हिसाब से 100 यूनिट से अधिक खपत करने पर शेष यूनिट पर 85 पैसा प्रति यूनिट दर घटेगा।
ग्रामीण व्यवसायिक उपभोक्ताओं का पहला स्लैब 7.79 रुपए प्रति यूनिट और दूसरा स्लैब 8.21 रुपए प्रति यूनिट है। इसको एक स्लैब कर दर 8.14 रुपए प्रति यूनिट रखा है। इस हिसाब से 100 यूनिट से अधिक खपत करने पर 7 पैसा प्रति यूनिट दर घटेगा।
अनुदान बढ़ाने पर बिजली सस्ती होगी… यदि वर्तमान समय के बराबर सरकारी अनुदान मिला तो ग्रामीण घरेलू समेत अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दर बढ़ेगी। वर्तमान दर के बराबर बिजली बिल लेने के लिए सरकारी अनुदान को बढ़ाना पड़ेगा। वर्तमान समय में 1.86 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने के लिए 3797 करोड़ अनुदान दे रही है। इससे पहले अप्रैल में सभी श्रेणी का दर घटाने के लिए 15,995 करोड़ का अनुदान दिया है।
1 सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं की दर में 35 पैसा प्रति यूनिट बढ़ोतरी करना।
2 डीएस-2, एनडीएस-1 और एनडीएस-2 श्रेणी के उपभोक्ताओं का स्लैब एक करना।
3 एनडीएस-2 श्रेणी के 0.5 किलोवाट तक के उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज 200 से घटाकर 150 रुपए प्रति माह करना।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
