नीट छात्रा रेप-मौत केस,शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस होगा कैंसिल:सख्त गाइडलाइंस
पटना नीट छात्रा रेप-मौत केस में शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस कैंसिल होगा। साथ ही हॉस्टल की संचालिका पटना में कोई भी हॉस्टल रन नहीं कर पाएंगी। बिहार डीजीपी विनय कुमार ने कहा है कि गर्ल्स हॉस्टल मैनेजमेंट से बड़ी लापरवाही हुई है इसलिए उनपर एक्शन लिया जाएगा।
वहीं सीबीआई के केस टेकओवर से पहले एसआईटी ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एसएसपी कार्तिकेय शमां ने कहा कि परिजन केस दर्ज नहीं कराना चाहते थे। एसएसपी ने माना कि एक कपड़े पर स्पर्म मिला है। कदमकुआं के एसआई और चित्रगुप्तनगर थानेदार को निलंबित किया गया है।इधर, मृतका के परिजनों ने जांच पर सवाल उठाए। कहा कि एसआईटी लगातार बयान बदल रही है। सही जांच की बजाय परिवार पर आत्महत्या मानने का दबाव है। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई है।
परिजनों ने पूछा कि दवा से मौत हुई तो रेप किसने किया। दवा के पत्ते को उन्होंने पिता की दवा बताया।
सवालों पर पुलिस बोली- नो कमेंट्स
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि केस पॉक्सो एक्ट में दर्ज है। सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। एसआईटी ने अब तक की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को दी है। 9 जनवरी को परिजनों के बयान पर केस दर्ज हुआ था। छात्रा की उम्र 18 साल से कम थी। सभी बयानों की वीडियोग्राफी कराई गई है। मीडिया के सवालों पर अधिकारियों ने नो कमेंट कहा।
परिजनों ने पूछा- दवा से मौत हुई तो रेप किसने किया
नीट छात्रा मामले में एसआईटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिस और परिजनों के बयान आमने-सामने आ गए हैं। केस दर्ज करने से लेकर दवा, रेप और जांच तक हर मामले पर आरोप और जवाब टकरा रहे हैं।
पुलिस के आरोप
SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, परिजन केस दर्ज नहीं कराना चाहते थे। प्रभात अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर गई थी। परिजनों ने कहा था कि होश आने के बाद बयान दर्ज कराइएगा।
छात्रा के कमरे से नींद की गोली अमिटॉल प्लस का पत्ता मिला। छात्रा ने इस दवा को लेकर इंटरनेट पर सर्च किया था। 27 दिसंबर को अरवल मोड़ से दवा खरीदी गई।
पुलिस को छात्रा के कपड़े परिजनों ने ही दिए थे। एसआईटी ने माना कि छात्रा के एक कपड़े में स्पर्म मिला। हॉस्टल का डीवीआर जब्त किया गया। सारे सीसीटीवी फुटेज एसआईटी के पास हैं।
कदमकुआं के एसआई और चित्रगुप्तनगर थानेदार को निलंबित किया गया। एसआईटी हर पहलू से जांच कर रही है। डीएनए, डिजिटल साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट देखी जा रही है।
परिजनों के जवाब
छात्रा के परिजनों ने कहा, SIT लगातार बयान बदल रही है। अस्पताल और पुलिस ने हमें दो-तीन दिन तक भ्रम में रखा। केस किसने दर्ज कराया, यह आज भी स्पष्ट नहीं है। अगर हम केस नहीं चाहते थे तो FIR कैसे दर्ज हुई?
परिजनों का दावा है कि दवा का पत्ता पिता का है। बुखार की दवा के साथ पत्ता बैग में चला गया था। इंटरनेट सर्च को लेकर संदेह है। लीपापोती के लिए मोबाइल से सर्च कराए जा सकते हैं।
परिजनों ने कहा कि स्पर्म मिलने के बाद भी आरोपी कौन है, यह नहीं बताया गया। रेप कहां हुआ, यह तय नहीं किया जा सका। गिरफ्तारी की बजाय हमें सुसाइड मानने को कहा जा रहा है।
25 दिन बाद भी जांच शून्य है। आरोपी की पहचान तक नहीं हो सकी। सीबीआई को 31 जनवरी को केस सौंपा गया, पर पांच दिन बाद भी टेकओवर नहीं हुआ।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस कैंसिल
डीजीपी ने कहा, नीट छात्रा मौत मामले में पुलिस को सूचना देने में काफी देरी हुई। ये हॉस्टल की जिम्मेदारी थी कि उनको तुरंत जानकारी देनी चाहिए थी, उन पर कार्रवाई की जाएगी। हॉस्टल चलाने का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। She/HE Cannot Run any Hostel in Patna’ हमलोग ये इंश्योर करेंगे। संचालिका ने पेरेंट्स को खबर कर दी, लेकिन पुलिस को एकदम ही खबर नहीं किया गया था।
डीजीपी विनय कुमार ने आगे कहा, जांच के दौरान सामने आया है कि कई हॉस्टलों में रहकर बच्चियां ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग करती हैं। ऐसे में हॉस्टलों में स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बेहद जरूरी है। अगर वातावरण स्वस्थ नहीं रहेगा तो बच्चे पढ़ नहीं सकेंगे और उनका भविष्य भी सही ढंग से नहीं संवर पाएगा।
कोचिंग और हॉस्टल दोनों की जिम्मेदारी
डीजीपी ने कहा कि सभी हॉस्टल संचालकों को हर पहलू पर ध्यान देना होगा। नक्शा पास करने वाली एजेंसियों को भी सतर्क रहना पड़ेगा कि हॉस्टल के कमरे सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करें।प्रॉपर लाइटिंग, रहने की व्यवस्था, खाने-पीने की व्यवस्था और कोचिंग संचालकों, स्टाफ और गार्ड्स का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाए, ताकि किसी का भी आपराधिक इतिहास न हो।
नियमित जांच और जीरो टॉलरेंस
सरकार ने साफ कर दिया है कि पुलिस, महिला हेल्प डेस्क और अभया ब्रिगेड मिलकर गर्ल्स हॉस्टलों की नियमित जांच करेंगे। किसी भी तरह की लापरवाही, संदिग्ध गतिविधि या नियम उल्लंघन पर तत्काल सख्त कार्रवाई होगी।
उधर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हॉस्ट्ल्स के रूल्स सख्त करने के कड़े निर्देश गिए। उन्होंने कहा कि अब राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टल और लॉज का पंजीकरण जरूरी होगा। हर थाना क्षेत्र में चल रहे हॉस्टल की पूरी जानकारी थाने में रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो सके, इसके लिए महिला हेल्प डेस्क को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
24 घंटे महिला वार्डन की होगी तैनाती
नए नियमों के तहत सभी गर्ल्स हॉस्टल और लॉज में 24 घंटे महिला वार्डन की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही वार्डन, गार्ड, रसोइया और सफाईकर्मी समेत सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा।
सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
हॉस्टल के मुख्य गेट, गलियारों, डायनिंग एरिया और पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी ताकि किसी भी घटना की जांच की जा सके।
पुरुषों के प्रवेश पर सख्त रोक
हॉस्टल के कमरों वाले हिस्से में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। हॉस्टल में आने वाले हर व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर और आधार विवरण विजिटर रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा।
हॉस्टल में पूरी रोशनी, बेहतर साफ-सफाई, मजबूत दरवाजे-ताले और खिड़कियों में लोहे की जाली होगी। रात में छात्राओं और स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने पर भी जोर दिया गया है।
आपात स्थिति के लिए 112 और अभया ब्रिगेड
आपात स्थिति से निपटने के लिए हॉस्टल में 112 नंबर, स्थानीय थाना, महिला हेल्प डेस्क और अभया ब्रिगेड की जानकारी वाले पोस्टर लगाए जाएंगे। छात्राओं को 112 इंडिया ऐप के इस्तेमाल और उसके सुरक्षा फीचर्स की जानकारी भी दी जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि पुलिस, महिला हेल्प डेस्क और अभया ब्रिगेड मिलकर हॉस्टलों की नियमित जांच करेंगे। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नियमों के उल्लंघन पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
