निःस्वार्थ सेवा, विनम्रता और प्रभु भक्ति के प्रतीक हैं हनुमान:आनंद
समस्तीपुर.विद्यापतिनगर.प्रखंड अंतर्गत मऊ बाजार में स्थित श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर परिसर में आयोजित वार्षिक यज्ञ के उपलक्ष्य में चल रही संगीतमय रामकथा के छठे दिन सोमवार की देर शाम श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। इस दौरान श्रीधाम वृंदावन से पधारी सुप्रसिद्ध कथा वाचिका राधेकृपा साक्षी जी के मुखारविंद से भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण के वनवास प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा के दौरान साक्षी जी ने बताया कि वनवास केवल त्याग का प्रतीक नहीं, बल्कि मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का वनगमन समाज को यह संदेश देता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सुख-सुविधाओं का त्याग भी करना पड़े, तो उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास का प्रसंग सुनते ही पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। संगीतमय प्रस्तुति ने कथा को और भी जीवंत बना दिया। भजन-कीर्तन और मधुर संगीत के साथ कथा का प्रवाह ऐसा रहा कि श्रोता समय का भान भूल बैठे।
“जरा देर ठहरो राम, तमन्ना यही है, अभी हमने जी भर के देखा नहीं है…” जैसे भावपूर्ण भजनों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक कथा स्थल से बांधे रखा। भजनों की हर पंक्ति पर श्रोता भावनाओं में डूबते नजर आए और पूरा वातावरण राममय हो उठा। आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि यह संगीतमय रामकथा आगामी पांच फरवरी तक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा के साथ-साथ वैदिक विधि से यज्ञ भी संपन्न कराया जा रहा है, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु आहुति दे रहे हैं।
इस अवसर पर यजमान के रूप में विनोद कुमार झा, नवीन कुमार सिंह, राज देव राय, गौतम कुमार शर्मा, राधिका शर्मा एवं प्रेम कुमार साह उपस्थित रहे। वहीं मंदिर समिति से जुड़े राजेश कुमार जायसवाल, सुजीत कुमार गुप्ता, भीम राज गुप्ता, प्रवीण कुमार साह, सुधीर कुमार साह, पंकज कुमार साह सहित अन्य सदस्य कार्यक्रम की व्यवस्था में सक्रिय रूप से जुटे रहे। श्रद्धालुओं ने बताया कि ऐसी धार्मिक कथाएं न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और संस्कारों को भी सुदृढ़ करती हैं।
उधर रामचरितमानस पाठ के सातवें दिन मंगलवार को सुंदर कांड का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर आचार्य आनंद नारायण शरण ने सुंदर कांड की कथा का सजीव और भावनात्मक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा और संगीत का आनंद लिया। आचार्य आनंद नारायण शरण ने सुंदर कांड के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कांड भक्ति, साहस, विश्वास और सेवा भाव का प्रतीक है। उन्होंने हनुमान जी की लंका यात्रा, माता सीता से भेंट, अशोक वाटिका प्रसंग तथा लंका दहन की कथा को भावपूर्ण शब्दों और सुमधुर संगीत के साथ प्रस्तुत किया। कथा के दौरान जैसे-जैसे प्रसंग आगे बढ़ता गया, श्रद्धालु भाव-विभोर होते चले गए। सुंदर कांड पाठ के दौरान भजनों और चौपाइयों की मधुर धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा व्यास के मुखारविंद से निकले प्रत्येक शब्द ने श्रोताओं के हृदय को छू लिया। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारे लगाते नजर आए। आचार्य शरण ने अपने प्रवचन में बताया कि सुंदर कांड मनुष्य के जीवन में आने वाले संकटों से उबरने की शक्ति प्रदान करता है। हनुमान जी का चरित्र हमें निःस्वार्थ सेवा, विनम्रता और प्रभु भक्ति का संदेश देता है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
