बोचहा घाट में राम विवाह का प्रसंग व मंगल गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल
Samastipur,मोहिउद्दीननगर,प्रखंड के बोचहा घाट स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री रामकथा के दूसरे दिन शनिवार को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा को लेकर दूसरे दिन से ही श्रोता श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी हैं। पूजा समिति की ओर से वृहत व्यवस्था की गई है। खाने पीने से लेकर उठने बैठने तक की उतम व्यवस्था है। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उपद्रवी तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पुरे पंडाल पर स्वंयसेवको की तिरछी नजर रहती है। इस कथा ज्ञान यज्ञ में वृंदावन से पधारीं प्रख्यात कथावाचिका राधाकृपा साक्षी दीदी ने संगीतमय कथा के माध्यम से राम विवाह की दिव्य लीला का वर्णन किया।
कथा के दौरान विवाह उत्सव का प्रसंग आते ही श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। मंगल गीतों और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथावाचिका ने जनकपुर में आयोजित माता सीता के स्वयंवर का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था। इसमें अनेक राजा-महाराजा और वीर योद्धा शामिल हुए, लेकिन कोई भी भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने में सफल नहीं हो सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने सहज भाव से शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया। इस प्रसंग के वर्णन के दौरान कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए।