समस्तीपुर ट्रेन में दो माह की बच्ची लावारिस मिली:आरपीएफ ने बचाया
समस्तीपुर में एक ट्रेन से दो महीने की बच्ची लावारिस हालत में मिली है। आरपीएफ की टीम ने बच्ची को रेस्क्यू कर चाइल्डलाइन टीम को सौंप दिया। इसके बाद चाइल्डलाइन की टीम बच्ची को तुरंत मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंची।बच्ची को देखने के लिए अस्पताल में लोगों की भीड़ लग गई। बच्ची को फिलहाल चाइल्डलाइन की निगरानी में रखा गया है। टीम उसकी मेडिकल जांच कराने के साथ ही उसके माता-पिता की पहचान और पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगी है।
चाइल्डलाइन के सदस्यों ने बच्ची को सदर अस्पताल पहुंचाया
चाइल्ड हेल्पलाइन टीम के सदस्य कुंदन कुमार ने बताया कि आरपीएफ पोस्ट से उन्हें ट्रेन में लावारिस बच्ची मिलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही कुंदन कुमार, गीता कुमारी और रूही कुमारी आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद गीता कुमारी बच्ची को लेकर सदर अस्पताल पहुंचीं।आरपीएफ ने बताया कि बच्ची के आसपास कोई माता-पिता या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था। आरपीएफ ने बच्ची को सुरक्षित अपनी निगरानी में लिया और चाइल्डलाइन टीम को इसकी जानकारी दी। चाइल्डलाइन के सदस्य मौके पर पहुंचे और बच्ची को अपने साथ सदर अस्पताल ले गए।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची की स्वास्थ्य जांच की। चाइल्डलाइन टीम के सदस्यों ने बताया कि इतनी कम उम्र की बच्ची को अकेला छोड़ देना एक गंभीर मामला है। बच्ची को कोई परेशानी न हो, इसके लिए उसकी देखभाल और स्वास्थ्य पर खास ध्यान रखा जा रहा है।
चाइल्डलाइन टीम के सदस्यों ने इस घटना को बेटा-बेटी में भेदभाव की सामाजिक सोच से जोड़ते हुए कहा कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटा और बेटी के बीच फर्क किया जाता है। उन्होंने कहा कि बेटी किसी परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों का हिस्सा होती है। यदि बच्ची को उसके माता-पिता या किसी परिजन ने जानबूझकर ट्रेन में छोड़ा है, तो यह बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला है।
हालांकि बच्ची को ट्रेन में छोड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। बच्ची के माता-पिता कौन हैं और वह किस परिस्थिति में ट्रेन में पहुंची, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। संबंधित टीम द्वारा मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। बच्ची के परिजनों की पहचान होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।
मां की गोद से अस्पताल तक का सफर
जिस उम्र में बच्चे को मां की गोद में सुरक्षित नींद आनी चाहिए, उस उम्र में यह मासूम ट्रेन के सफर में अकेली मिली। उसे शायद यह भी नहीं पता कि वह कहां है और उसके अपने लोग कहां चले गए। आरपीएफ के जवानों ने बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद चाइल्डलाइन टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाकर इलाज और देखभाल की व्यवस्था शुरू की।
घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मासूम बच्चों को इस तरह अकेला छोड़ने की नौबत क्यों आती है। फिलहाल बच्ची की पहचान और उसके परिजनों की तलाश महत्वपूर्ण है। चाइल्डलाइन टीम बच्ची की देखभाल में जुटी है, जबकि पूरे मामले की जानकारी संबंधित स्तर पर जुटाई जा रही है। चाइल्डलाइन टीम के सदस्य कुंदन कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बच्ची को बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत किया जाएगा बाल कल्याण समिति के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
