समस्तीपुर में रेलकर्मियों का प्रदर्शन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग
समस्तीपुर में अगस्त क्रांति दिवस पर रविवार को ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन (ECREU) ने मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय के सामने एक जन कन्वेंशन आयोजित किया। इसमें बड़ी संख्या में रेलकर्मियों ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।
यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महासचिव और इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय सह महासचिव रत्नेश वर्मा मुख्य वक्ता थे। रत्नेश वर्मा ने कहा कि नई श्रम नीति, निजीकरण, निगमीकरण, एनपीएस-यूपीएस और बोनस सीलिंग जैसे निर्णय कर्मचारी हितों के खिलाफ हैं।उन्होंने चेतावनी दी कि रेलवे को निजी हाथों में सौंपना जाएगा तो कर्मचारी संगठित होकर विरोध करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने की, जबकि संचालन मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने किया। मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने जोर देकर कहा कि पेंशन, वेतन, भत्ता, बोनस, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति, ड्यूटी रोस्टर और विश्राम जैसी सुविधाएं रेलकर्मियों के अधिकार हैं। उन्होंने कर्मचारियों से इन अधिकारों को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने लेबर कोड वापस लेने, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और रेलवे के निजीकरण-निगमीकरण पर तत्काल रोक लगाने के लिए निर्णायक आंदोलन की घोषणा की।
रेलवे कर्मचारियों पर निजीकरण थोपा जा रहा
केंद्रीय संगठन सचिव चंदन यादव ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों पर निजीकरण और निगमीकरण थोपा जा रहा है। उन्होंने 55/30 सर्विस रिव्यू जैसी नीतियों से कर्मचारियों में बढ़ रही असुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए देशभर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की।एआईसीसीटीयू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि देश के मजदूरों की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ठेका मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने चार लेबर कोड के माध्यम से श्रमिक अधिकारों को कमजोर किए जाने की बात कही।
कन्वेंशन में रेलवे के रिक्त पदों पर नियुक्ति करने, आउटसोर्सिंग समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन देने और सभी विभागों में आठ घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।इसके अलावा रन-ओवर दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच, रेलकर्मियों को जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराने, रेलवे अस्पतालों और आवासीय सुविधाओं का विस्तार करने, स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता लाने और विभिन्न भत्तों का समय पर भुगतान करने की मांग भी की गई।
वक्ताओं ने कहा कि रेलकर्मियों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत फैसलों और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन से होना चाहिए। कर्मचारियों ने कहा कि रेलवे की सुरक्षा और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मियों की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
कन्वेंशन में ये रहे मौजूद
कन्वेंशन को राजकुमार, प्रेम कुमार ठाकुर, संतोष मिश्रा, प्रमोद कुमार राय, सोनू कुमार, वीरेंद्र कुमार, दिलीप कुमार, रत्न मिश्र, राजीव कुमार, अविनाश कुमार, चंदन कुमार, संतोष मिश्र, कैलाश कुमार, संगम कुमार, राज कुमार, एक्टू के ललन कुमार, रेल विकास मंच के राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, सुशील कुमार, रामलाल राम, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार, दीनबंधु प्रसाद और शाहीद हुसैन सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। अंत में कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
