Patna

बांकीपुर में छा गए प्रशांत किशोर, 2025 में हार के 9 महीनों बाद BJP को उसी के गढ़ में पछाड़ दिया

पटना की बांकीपुर सीट पर 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू हुई. शुरुआत से ही जन सुराज के प्रशांत कुमार बीजेपी और आरजेडी से आगे चल रहे हैं. अब तक के रुझानों से लगभग तय माना जा रहा है कि बांकीपुर को प्रशांत किशोर ही नये विधायक मिलने वाले हैं. बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर के इस प्रदर्शन की चर्चा तेज हो गई है.

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2025 विधानसभा में बुरी तरह हारी थी पीके की पार्टी

2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था. लेकिन जन सुराज को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था. एक भी सीट पर प्रशांत किशोर की पार्टी के उम्मीदवार जीत नहीं पाए थे. इसके बावजूद लगभग 9 महीनों के बाद फिर जन सुराज चुनावी मैदान में उतरी. 2025 में पीके ने खुद चुनाव न लड़कर पार्टी के नेताओं को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन बांकीपुर उपचुनाव सीट पर उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया.बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बांकीपुर सीट पर बीजेपी के नितिन नबीन ने 98 हजार से ज्यादा वोट लेकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी आठ हजार वोट भी नहीं जुटा सकी थीं. ऐसे में अब सवाल है कि नौ महीने के अंदर ऐसा क्या बदल गया कि प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतर गए और बीजेपी के किले को ध्वस्त करने की तरफ बढ़ रहे हैं.

 

क्या कहना है राजनीतिक जानकारों का?

इस मामले में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार चुनाव की कहानी अलग है. विधानसभा चुनाव में कई वोटर्स ने रणनीतिक वोटिंग की थी. उन्हें डर था कि अगर उन्होंने जन सुराज का साथ दिया तो इसका फायदा आरजेडी को मिल सकता है. 2025 में नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट मिले थे. लेकिन अब सम्राट चौधरी सीएम हैं. ऐसे में उपचुनाव में सरकार नहीं बदलनी थी और न ही मुख्यमंत्री तय होना था. इस वजह से वोटर्स ने पहले की तुलना में ज्यादा स्वतंत्र होकर वोट किया.

 

साथ ही उनका यह भी मानना है कि इस बार चुनाव किसी चेहरे से ज्यादा स्थानीय मुद्दों और विधानसभा में मजबूत आवाज की जरूरत पर लड़ा जा रहा है. बांकीपुर की जनता ऐसा विधायक चाहती है, जो सड़क, ट्रैफिक, जलजमाव और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाए. विधानसभा में विपक्ष की कोई बुलंद आवाज नहीं है. अगर जन सुराज जीतती है तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट पर और हारेंगे भी तो बिहार में पूरे जोश के साथ ही बने रहेंगे.

 

2025 में पीके की हार के बाद क्या जताई गई थी संभावना?

प्रशांत किशोर जब 2025 में हारे थे, तब भी कुछ राजनीतिक जानकारों ने पॉजिटिव रिएक्शन दिया था. उनका कहना था कि जन सुराज की हार में जीत छिपी है. वे हार कर भी जनता के बीच अपनी छाप छोड़ गए. ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि जनता उन्हें एक मौका जरूर ही देगी. जनता पहली बार किसी को मौका देने में हिचकती है और हो सकता है उन्हें और समय देना चाहती है.

 

राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने जो मुद्दे उठाए थे, वह कहीं ना कहीं जायज थे. वे लोगों के बीच गए, उनसे मिले और आम लोगों के मुद्दों की बात की. लेकिन बावजूद उन्हें मुंह की खानी पड़ी. संभावना जताई गई थी कि वह खुद को इस बार हारा हुआ जरूर पाएं, लेकिन ये कहीं ना कहीं राजनीति में उतरे इस नए खिलाड़ी की एक शानदार शुरुआत है जो आगे जीत में बदल सकती है.

 

बांकीपुर में छाए प्रशांत किशोर

कुछ ऐसा ही नजारा बांकीपुर उपचुनाव में देखने के लिए मिल रहा है. बीजेपी के गढ़ में जन सुराज के प्रशांत किशोर छा गए हैं. अगर प्रशांत किशोर यहां मजबूत प्रदर्शन के साथ जीत जाते हैं तो जन सुराज को राज्य की राजनीति में नई ताकत के रूप में देखा जाएगा. फिलहाल, वोटों की गिनती जारी है. वोटिंग की गिनती के शुरुआत से ही प्रशांत किशोर लगातार आगे बढ़ रहे हैं. बीजेपी दूसरे जबकि आरजेडी तीसरे नंबर पर है.

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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