मां-बाप से बेटे ने फेरा मुंह, न्याय के लिए कलेक्ट्रेट में बिलखते रहे वृद्ध दंपती
मोतिहारी.जिस बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी के सहारे बुढ़ापा काटने का सपना देखने वाले एक वृद्ध दंपती की जिंदगी आज बेबसी और आंसुओं के सहारे गुजर रही है। बंजरिया के अंबिका नगर निवासी होरिला देवी और उनके पति लक्ष्मण साह बुधवार को न्याय की आस लेकर एसडीओ सदर के यहां पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। चिलचिलाती धूप में घंटों भटकने के बाद दोनों कलेक्ट्रेट परिसर में ही रोते-बिलखते रहे। उनका दर्द सुनने वाला कोई नहीं था। होरिला देवी ने बताया कि उनका पुत्र कमलेश कुमार अपनी पत्नी के साथ रहता है, लेकिन उसने माता-पिता से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। दोनों ने एसडीओ कोर्ट में भरण-पोषण दिलाने की गुहार लगाई थी। कोर्ट से उन्हें एक नोटिस मिला था, जिसमें बुधवार को पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था।
उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी पीड़ा सुनेगा। लेकिन एसडीओ कोर्ट परिसर में मौजूद कर्मियों ने उन्हें वकील रखने की सलाह दे दी। यह सुनकर दंपति की आंखों से आंसू छलक पड़े। होरिला देवी ने कहा, “घर में खाने तक के पैसे नहीं हैं। वकील का खर्च कहां से उठाएंगे। यदि पैसे होते तो न्याय मांगने नहीं आते।” वृद्ध दंपति ने नवपदस्थापित डीएम सौरभ सुमन यादव से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। जल्द सहायता नहीं मिली तो उनके सामने भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
^भरण-पोषण कल्याण अधिनियम के तहत वृद्धजन को सभी आवश्यक सहायता देने का प्रावधान है। बुधवार को उक्त दंपति आए थे, लेकिन फील्ड विजिट के कारण वे नहीं मिल सके। यदि उक्त दंपती वकील रखने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो वे सिर्फ सादा कागज पर एक आवेदन दे सकते हैं। उसके आधार पर ही भरण-पोषण संबंधी निर्णय ले लिया जाएगा। – निशांत सिहारा, एसडीओ सदर, मोतिहारी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
