Darbhanga

नेपाल में बैरेज की फाटक खोलने के बाद बढ़ा नदियों का जलस्तर,कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा

दरभंगा।कुशेश्वरस्थान पूर्वी : नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले सप्ताह से हो रही बारिश का असर अब मिथिलांचल के निचले इलाकों में दिखने लगा है। नेपाल से आने वाले पानी के दबाव को देखते हुए वीरपुर बैरेज के सात फाटक खोले जाने के बाद पूर्वी प्रखंड से होकर गुजरने वाली कोसी एवं कमला बलान नदी के जलस्तर में अचानक तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रखंड के कई निचले इलाकों में बाढ़ ने दस्तक दे दी है और लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।

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कमला बलान नदी के जलस्तर में वृद्धि होने से पश्चिमी तटबंध के पूरब बसे क्षेत्रों में सबसे पहले बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। इटहर पंचायत के चौकिया, लक्ष्मीनियां और बलथरवा गांव सहित भिण्डुआ पंचायत के गोबराही गांव का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। इन गांवों के लोगों को प्रखंड मुख्यालय या बाजार तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अब नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। वही इटहर गाँव निवाशी शिक्षक घनश्याम ठाकुर ने बताया कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय बरनिया विद्यालय में पढ़ाते हैं विद्यालय जाने के लिए अब नाव का सहारा लेना पड़ता है, शिक्षक श्री ठाकुर ने बताया कि नाव ससमय नही मिलने के कारण विद्यालय सही समय पर नही पहुँच पाते हैं और सबके अधिक दिक्कत तो उस समय होती है जब विद्यालय से छुट्टी होती है तो गांव जाने के लिए नाव का घंटो इंतजार करना पड़ता है। कभी कभी तो नाव पर अधिक लोग चढ़ जाते हैं नाव की कि छमता से अधिक लोग चढ़ने पर खतरा सा लगता है। निजी नाव के सहारे नाव भारा देकर मुख्यालय या विद्यालय जाना पड़ता है।

ग्रामीणों जय कुमार ने बताया कि निजी नाव संचालक यात्रियों से किराया लेकर आवागमन करा रहे हैं। सड़क मार्ग बाधित होने से दैनिक मजदूरों, छात्रों, किसानों तथा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

 

 

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पानी का फैलाव लगातार बढ़ रहा है। यदि अगले कुछ दिनों तक नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों को आशंका है कि कई और गांवों का संपर्क भी प्रभावित हो सकता है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर अभी सरकारी नावों की नियमित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को निजी नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इधर कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण छोटकी कोनिया, बड़की कोनिया, कुंज भवन, सेवका तथा ब्रह्मोत्तर गांव के समीप कटाव का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि फिलहाल कहीं से कटाव की सूचना नहीं है, लेकिन नदी की तेज धारा और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का बहाव और तेज हुआ तो इन गांवों के समीप कटाव शुरू हो सकता है, जिससे कृषि भूमि के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों को भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। खेतों में लगी धान की नर्सरी तथा अन्य फसलें पानी के कारण प्रभावित होने लगी हैं। पशुपालकों को भी चारा और आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते राहत एवं बचाव की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग की है।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कहीं भी बाढ़ जैसी गंभीर परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि पर नजर रखी जा रही है।

 

 

 

यदि पानी बढ़ने का क्रम जारी रहा तो कमला बलान नदी के पश्चिमी तटबंध के पूरब स्थित इटहर, उसरी, उजुआ-सिमरटोका तथा तिलकेश्वर पंचायत के बड़े हिस्से में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

इस संबंध में प्रभारी अंचल अधिकारी राकेश सिंह यादव ने बताया कि कोसी एवं कमला बलान नदी के जलस्तर में वृद्धि की सूचना प्राप्त हुई है। प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

 

 

ग्रामीणों की मांग और आवश्यकता के अनुसार नावों की व्यवस्था की जाएगी। अंचल प्रशासन द्वारा संभावित बाढ़ से निपटने के लिए पूर्व तैयारी पूरी कर ली गई है तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन समय रहते नाव, राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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