बिहार के उड़नबाज पीयूष अब हांगकांग-यूएस की ट्रैक पर उड़ेंगे,दमखम दिखाएंगे
पटना.नेशनल इंटर डिस्ट्रिक्ट जूनियर एथलेटिक्स मीट (निडजैम) की खोज बिहार के पीयूष राज अब हांगकांग और अमेरिका के ट्रैक पर दमखम दिखाएंगे। पीयूष ने एशियन और वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है। अब दुनिया की नजरें बिहार के इस युवा एथलीट पर टिकी हैं, क्योंकि ओलंपियन शिवनाथ सिंह के बाद पीयूष बिहार के पहले एथलीट हैं, जो वर्ल्ड लेवल की इन प्रतियोगिताओं के लिए क्वालीफाई किया है।
माता-पिता की मौत भी नहीं रोक पाई राह : रोहतास जिले के बंजारी के रहने वाले पीयूष राज के बचपन मुफलिसी में बीता है। साल 2010 में पीयूष ने अपनी मां को खोया। अभी इस सदमे से उबरे भी नहीं थे कि 2018 में पिता मनीष श्रीवास्तव का भी निधन हो गया। महज कुछ साल के अंतराल में माता-पिता को खो देने वाले पीयूष के पास रोने का भी समय नहीं था।
उन्होंने अपनी हताशा को अपनी ताकत बनाया और दौड़ना शुरू किया। उनके लिए ट्रैक सिर्फ खेल का मैदान नहीं, बल्कि अपनी किस्मत बदलने का रास्ता बन गया। लेकिन, आज उसी पीयूष की रफ्तार की गूंज हांगकांग से लेकर अमेरिका तक सुनाई देने वाली है। पीयूष ने जूनियर एशियन और जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर भारतीय खेलों में इतिहास रच दिया है।
निडजैम से मिली पहचान
बिहार में फरवरी 2023 में हुए निडजैम पीयूष के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में हुए इस आयोजन में दौड़ते हुए जब उसने फिनिश लाइन पार की, तो खेल विशेषज्ञों को समझ आ गया कि इस लड़के के पैरों में गजब की फुर्ती है। इसके बाद बिहार खेल प्राधिकरण ने उन्हें गोद लिया और उनकी प्रतिभा को तराशने की जिम्मेदारी उठाई। पिछले तीन सालों से पीयूष हैदराबाद में द्रोणाचार्य अवार्डी कोच रमेश जी के सानिध्य में पसीना बहा रहे हैं। उनकी ट्रेनिंग और डाइट का पूरा खर्च बिहार सरकार उठा रही है। राष्ट्रीय स्तर की इस एथलेटिक्स प्रतियोगिता में देश भर के 600 जिलों के 6000 एथलीटों ने हिस्सा लिया था।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
