समस्तीपुर:अस्पताल में प्रसूता को बंधक बनाया, जुड़वां बच्चों की मौत:पैसे न देने पर टांके नहीं काटे
समस्तीपुर के एक निजी अस्पताल में महिला को बंधक बनाकर रखा गया। उसे ऑपरेशन से जुड़वा बच्चे हुए थे। ऑपरेशन करने वाला कोई डॉक्टर नहीं बल्कि अप्रशिक्षित कर्मी था। जिसके कारण बच्चों की स्थिति नाजुक हो गई थी। दोनों को चाइल्ड केयर में भर्ती कराया गया था, पर उनकी मौत हो गई।
दूसरी तरफ बच्चों की मां को निजी अस्पताल से पैसों को लेकर छोड़ा नहीं जा रहा था। महिला को 12 टांके लगे थे, पैसे नहीं देने पर अस्पताल वालों ने 10 काटे और 2 टांके छोड़ दिए थे। पीड़िता को काफी पीड़ा में रखा गया।परिजन ने मवेशी बेचकर और चंदा मांगकर किसी तरह 90 हजार अस्पताल में जमा किए, लेकिन 40 हजार रुपए और मांगे जा रहे थे। नहीं देने पर महिला को छोड़ा नहीं जा रहा था। अंत में परिजन स्थानीय विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन के पास पहुंचे। उनके हस्तक्षेप के बाद पीड़िता को अस्पताल से छोड़ा गया। विधायक ने उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं उसके 2 टांके कटे।
पीड़ित महिला कर्पूरी ग्राम थाना क्षेत्र के डढिया बेलार गांव निवासी रामबाबू पासवान की पत्नी सुमन देवी है। सुमन के चाचा गुलाब पासवान ने कहा कि 3 सितंबर को भतीजी को अस्पताल में भर्ती कराया था। उस वक्त ऑपरेशन के लिए 3 लाख रुपए की डिमांड की गई थी.किसी तरह से 90 हजार रुपए का इंतजाम तो हो गया, पर बाकी के रुपए की व्यवस्था नहीं हो रही थी। कोई रास्ता नहीं दिखा तो हमलोग विधायक के पास गए। उन्होंने हमलोगों को बैठाया और हमारी समस्या सुनी।
कर्मी और संचालक फरार हो गए
विधायक परिजन को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां की व्यवस्था देखकर वह चौंक उठे। अस्पताल में मानक के अनुसार कुछ भी नहीं था। यहां ऑन कॉल डॉक्टर को बुलाने की बात कही गई, लेकिन वहां के कर्मी ही सब कुछ करते थे। जिसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी स्थानीय थाने को दी।जिसके बाद वहां के कर्मी और संचालक फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस के सहयोग से महिला को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दलालों ने निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया
विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन कहा कि दलालों ने महिला को निजी अस्पताल में भेज दिया। परिवार गरीब है। अस्पताल में किसी अप्रशिक्षित ने ऑपरेशन किया। इस कारण दोनों बच्चों की भी मौत हो गई। महिला को 2 दिन में छोड़ देना चाहिए था, पर ऐसा नहीं किया गया।
भैंस बेचकर 90 हजार तक परिवार ने दिया, फिर भी 40 हजार मांगे जा रहे थे। जिला प्रशासन को कार्रवाई करना चाहिए। पुलिस भी आई।सिविल सर्जन से कहा है कि ऐसे हॉस्पिटलों की त्वरित जांच करें और अस्पताल को सील कर प्राथमिकी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल खराब है।नगर थाना अध्यक्ष शिवकुमार यादव ने कहा,मामले से संबंधित कोई भी आवेदन अभी नहीं मिला है। आवेदन मिलते ही इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
