छोटे कपड़े पहनाते थे,कस्टमर जबरदस्ती करते थे’:दलसिंहसराय से गायब,रेड”लाइट एरिया में फंसी छात्रा ने बताया आपबीती
दलसिंहसराय,प्रेम प्रसंग में घर से निकली 9वीं की छात्रा मानव तस्करों के चंगुल में फंसकर पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर के रेडलाइट एरिया में पहुंचा दी गई। आरोप है कि वहां उसे करीब तीन साल तक जबरन दे”ह व्यापार में धकेलकर उसका शारीरिक शो”षण किया गया। विरोध करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी और कई बार भूखा भी रखा जाता था।
कुछ दिन पहले रेडलाइट एरिया के पास बिहार के एक फल दुकानदार की मदद से नाबालिग किसी तरह देह व्यापार के धंधे से निकलकर दलसिंहसराय अपने घर पहुंची।दलसिंहसराय पुलिस ने उसका मेडिकल चेकअप कराया है। शुक्रवार को कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया। नाबालिग और उसके परिजन ने कैमरे के सामने आने से इनकार किया है।
मामला 27 मई 2023 का है। नाबालिग उजियारपुर प्रखंड के हाईस्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। उस समय उसकी उम्र महज 13 साल थी। स्कूल से लौटने के बाद उसने अपने भाई को बताया कि वो स्कूल की कुछ लड़कियों के साथ घूमने जा रही है। इसके बाद वह घर नहीं लौटी।
देर शाम तक वापस नहीं आने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जिन लड़कियों के साथ घूमने जाने की बात उसने कही थी, उनके घर पहुंचने पर पता चला कि नाबालिग गांव के ही गोलू कुमार के साथ बाइक से चली गई है।परिजन गोलू के घर पहुंचे, लेकिन वह नहीं मिला। अगले दिन गोलू के घर लौटने पर पूछताछ की गई तो उसने नाबालिग के पटना में होने की जानकारी दी। इसके बाद परिजन पटना पहुंचे और नाबालिग की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। वापस लौटने के बाद परिजन ने गोलू और उसके भाई को पुलिस के हवाले कर दिया।
पटना जंक्शन पर महिला ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर किया बेहोश
तीन साल बाद मानव तस्करों और देहव्यापार के दलदल से निकलकर समस्तीपुर पहुंची नाबालिग ने बताया कि मुझे गोलू बाइक से लेकर पटना जंक्शन पहुंचा था। हम दोनों के साथ एक और युवक था।
नाबालिग ने बताया कि स्टेशन पर कुछ देर के लिए गोलू हम दोनों के साथ मौजूद युवक के साथ मुझसे कुछ दूर जाकर बात करने लगा। इसी दौरान एक महिला मेरे पास और और कहा कि मुझे तुम्हारी देखभाल के लिए गोलू ने ही भेजा है।इसके बाद महिला ने पुचकारते हुए मुझे खाना दिया। मैंने खाना खाना शुरू किया तो मुझे अजीब स्वाद लगा, लेकिन जब तक मैं किसी को कुछ पता पाती, मैं बेहोश हो गई।
‘जब होश आया तो मैंने खुद को एक कमरे में बंद पाया’
नाबालिग के मुताबिक, जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को एक कमरे में बंद पाया। मैं कहां थी, किसके पास थी, मुझे कुछ नहीं पता था। थोड़ी देर बाद पता चला कि मुझे जहां रखा गया था, वहां 10 से 12 और लड़कियां रखी गई हैं।
जब लड़कियों से मैंने पूछने की कोशिश की कि मैं कहां हूं, किसके पास हूं, मुझे यहां कौन लेकर आया है, लड़कियों ने बताया कि हम सभी पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में है और हम जिस जगह पर हैं, यहां देह व्यापार होता है, हमारी तरह तुम्हारा भी किसी ने यहां सौदा कर दिया है।
‘देहव्यापार की बात सुनकर मैं रोने लगी, लगा अब सब खत्म’
नाबालिग ने बताया कि जब मुझे पता चला कि मैं देहव्यापार के कारोबारियों के चक्कर में फंस गई हूं, तो मैं रोने लगी। मुझे गोलू पर गुस्सा आ रहा था, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पा रही थी। मन में ख्याल आ रहा था कि अब मुझे किस हाल में जीना पड़ेगा। इतने में वहां मौजूद लड़कियों ने मुझे चुप कराया और कहा कि अब तुम्हें इसी माहौल में रहना पड़ेगा, ये तुम्हारी नहीं हम सबकी मजबूरी है।
मारपीट के बाद मुझे एक अलग कमरे में बंद कर दिया गया, जहां पहले से एक अधेड़ व्यक्ति मौजूद था। मेरे हाथ जोड़ने और गिड़गिड़ाने के बावजूद अधेड़ ने भी मेरे साथ मारपीट की और नशे की हालत में मेरे साथ जबरदस्ती की। मैं बचाने के लिए, खुद को छोड़ देने के लिए चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। इसके बाद रोज मेरे साथ ये सब होने लगा।
पुलिस रेड की भनक लगते ही आठ नाबालिगों को दूसरी जगह भेजा
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि एक दिन रेडलाइट एरिया में पुलिस की छापेमारी हुई। हालांकि, इसकी भनक संचालक को पहले ही लग गई थी। इसके बाद कम उम्र की आठ लड़कियों को खिड़की के रास्ते दूसरे फ्लैट में शिफ्ट कर दिया गया।
पुराने कमरे से पुलिस 13 युवतियों को अपने साथ ले गई। मैं भी शोर मचाना चाहती थी, लेकिन मेरे मुंह को कपड़े की मदद से बांध दिया गया था।नाबालिग के मुताबिक, मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा था, मुझे लगा कि मैं अब कभी भी इस जगह से बाहर नहीं निकल पाऊंगी। इस तरह ढाई साल से अधिक समय बीत गया।
ग्राहक बनकर पहुंचे फल दुकानदार ने सुनी आपबीती, फिर की मदद
नाबालिग के अनुसार, करीब तीन महीने पहले एक फल दुकानदार कस्टमर बनकर रेड लाइट एरिया में पहुंचा। मैंने उसे अपनी आपबीती बताई, जिसके बाद दुकानदार ने मुझे भरोसा दिया कि मैं तुम्हें यहां से निकाल दूंगा।
पीड़िता ने बताया कि 30 अक्टूबर को दुकानदार की मदद से मैं वहां से निकलने में सफल रही। दुकानदार ने रेडलाइट एरिया संचालिका से मुझे अपने साथ ले जाने के लिए पैसे दिए थे। इसके बाद दुकानदार ने रास्ते में कई बार टैक्सी और रिक्शा बदलकर मुझे किशनगंज पहुंचाया। यहां से मुझे पटना जाने वाली ट्रेन पर बैठा दिया।2 नवंबर को पटना पहुंचने के बाद मैं अपने घर दलसिंहसराय पहुंची। घर लौटने के बाद परिजनों ने पुलिस को इसकी सूचना दी।
ग्रामीण एसपी बोले- मानव तस्करी के बिंदु पर होगी जांच
ग्रामीण एसपी मुकुल रंजन ने बताया कि शुरुआत में ये मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ था। इस मामले में पहले दो लोगों को पकड़ा गया था। इनमें एक नाबालिग और दूसरा बालिग था। दोनों फिलहाल जमानत पर हैं। अब नाबालिग के घर लौटने के बाद मामले में मानव तस्करी का पहलू सामने आया है।नाबालिग का बयान लिया गया है। मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया है। इसके आधार पर पूरे गिरोह की भूमिका की जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
