राजधानी से पहुंची 55 लाख की हेरोइन, हाजीपुर बना सेफ रूट
वैशाली।हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर पुलिस और खुफिया एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन में एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। प्रीमियम ट्रेन ‘राजधानी एक्सप्रेस’ की सुरक्षा व्यवस्था और ढीली जांच का फायदा उठाकर असम से हेरोइन की तस्करी कर रहे एक शातिर अपराधी को हाजीपुर स्टेशन के गेट नंबर-2 के पास से दबोच लिया गया। पकड़ा गया आरोपी देसरी थाना क्षेत्र के नयागंज सोनर टोली का रहने वाला अमरेश कुमार है। आरोपी के पास मौजूद काले रंग के बैग की तलाशी लेने पर 276.83 ग्राम व्यावसायिक मात्रा की हेरोइन बरामद की गई, जिसकी स्थानीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 55 लाख रुपये बताई जा रही है।
यह पूरी कार्रवाई नगर थाना पुलिस, एसटीएफ हाजीपुर और मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों से मिली सटीक गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलते ही वैशाली के पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शुभांक मिश्रा के निर्देश पर सदर एसडीपीओ-1 सुबोध कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में नगर थानाध्यक्ष सिकंदर कुमार और अन्य पुलिस बल को दंडाधिकारी की मौजूदगी में स्टेशन परिसर और बाहर निगरानी के लिए तैनात किया गया।
इसी दौरान बैग लेकर तेजी से निकल रहे एक संदिग्ध व्यक्ति पर पुलिस की नजर पड़ी। पुलिसबल को देखते ही उसने छिपने और भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर उसे मौके पर ही पकड़ लिया। गहन तलाशी में हेरोइन के अलावा दो मोबाइल फोन, ₹3,170 नकद, दो आधार कार्ड और एक रेल टिकट बरामद हुआ। पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि बरामद दो आधार कार्डों में से एक पूरी तरह से फर्जी है, जिसे वह होटलों में पहचान छिपाकर ठहरने के लिए इस्तेमाल करता था।
पूछताछ में आरोपी अमरेश कुमार ने स्वीकार किया कि वह पिछले छह महीनों से तस्करी के इस अवैध धंधे में सक्रिय था और इस दौरान असम से चार बार हेरोइन की बड़ी खेप लाकर स्थानीय नेटवर्क के जरिए बेच चुका था। मामले में नगर थाना कांड संख्या 1069/26 दर्ज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। सदर एसडीपीओ-1 सुबोध कुमार ने बताया कि जिले में ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ के तहत यह एक बड़ी कामयाबी है। फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले जालसाज तथा हेरोइन के स्थानीय खरीदारों की पहचान कर ली गई है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। {वीआईपी ट्रेनों का इस्तेमाल: सुरक्षा जांच और चेकिंग से बचने के लिए तस्कर आम ट्रेनों के बजाय राजधानी एक्सप्रेस जैसी हाई-फाई ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। {फर्जी दस्तावेजों पर स्टे: असली पहचान छिपाने के लिए गिरोह फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करता है ताकि किसी भी शहर में बिना शक के होटलों में ठहरा जा सके। {कम मात्रा में ज्यादा कीमत की तस्करी: भारी सामान के बजाय कम वजन (जैसे 276 ग्राम) वाली महंगी ड्रग्स को बैकपैक में छुपाकर सुरक्षित ट्रांसपोर्ट करते हैं। {स्थानीय पेडलर्स का नेटवर्क: असम या पूर्वोत्तर राज्यों से खेप लाने के बाद इसे सीधे उपभोक्ताओं को न बेचकर स्थानीय एजेंटों और पेडलर्स के नेटवर्क में सप्लाई करते हैं। {सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करना: स्टेशन से बाहर निकलते ही तुरंत भागने के बजाय भीड़ में घुलने-मिलने और सार्वजनिक गेटों का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करते हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
