सरकारी चावल चोरी में फंसे अफसर:कांटी गोदाम के 400 बोरी चावल से हो रही थी कालाबाजारी
मुजफ्फरपुर,जिले में गरीबों के सरकारी चावल की चोरी और उसे बचाने के प्रशासनिक खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। कांटी सीएमआर गोदाम से निकले 400 बोरी राशन में से 15 बोरी चावल कालाबाजारी के लिए पिकअप पर उतारा जा रहा था। पुलिस गश्ती दल ने इसे पकड़ा, लेकिन केस दर्ज करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी ही मामले को दबाने में जुट गए। मामला सामने आने पर डीएम कुमार गौरव ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई। जांच में एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव, मीनापुर के एमओ धीरेंद्र कुमार, पानापुर ओपी अध्यक्ष अभिषेक कुमार मिश्रा और ट्रांसपोर्टर राजेंद्र दुबे की संलिप्तता उजागर हुई है। जांच टीम ने सभी पर कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।
कैसे हुआ पूरा खेल और कैसे हुआ खुलासा
13 अक्टूबर को निकला था ट्रक : कांटी सीएमआर गोदाम से 400 बोरी चावल लादकर ट्रक (BR-06-G-5769) टीपीडीएस गोदाम के लिए निकला। गणपति धर्मकांटा पर इसका वजन कराया गया।
किशुननगर ढाला पर पकड़ी गई चोरी : शाम 4 बजे किशुननगर ढाला के पास ट्रक से 15 बोरी चावल टाटा मैजिक पिकअप (BR-06-GF-0509) पर अनलोड किया जा रहा था। पानापुर ओपी गश्ती दल ने रंगे हाथ पकड़ा।
टायर पंक्चर का फर्जी बहाना : ट्रांसपोर्टर ने दावा किया कि ट्रक का टायर पंक्चर था और जैक लगाने के लिए 15 बोरी उतारी जा रही थी। जांच टीम ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
सबूत मिटाने की कोशिश : एमओ धीरेंद्र कुमार ने 15 बोरी चावल वापस ट्रक पर लोड करवाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। उन्होंने एसएफसी के डीएम को इसकी जानकारी नहीं दी।
थाने से बिना एंट्री छोड़ा वाहन : थानेदार अभिषेक कुमार मिश्रा ने पिकअप को सीसीटीवी से बाहर रखा और बिना सीनियर अधिकारियों की अनुमति के चालक समेत छोड़ दिया।
व्हाट्सएप कॉल से पोल खुली : थानेदार ने जांच टीम को बताया कि एसडीओ आनंद उत्सव ने दो बार व्हाट्सएप कॉल कर एफआईआर न करने का दबाव बनाया। एसडीओ ने कहा कि प्राथमिकी से मामला बड़ा हो जाएगा, जांच कर गाड़ी छोड़ दें। थानेदार ने इस कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग जांच टीम को सौंप दी।
प्रशासनिक तंत्र व राशन माफिया के सांठगांठ का प्रत्यक्ष प्रमाण
यह मामला प्रशासनिक तंत्र और राशन माफिया के साठगांठ का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जब व्यवस्था के रक्षक ही चोरी छिपाने और सबूत मिटाने में लग जाएं, तो गरीबों की योजनाएं दम तोड़ देती हैं। थानेदार द्वारा की गई व्हाट्सएप कॉल की रिकॉर्डिंग ने अधिकारियों के बचाव के तमाम दावों की पोल खोल दी। टायर पंक्चर का बहाना केवल लीपापोती की एक नाकाम कोशिश साबित हुआ। डीएम द्वारा गठित जांच दल की त्वरित रिपोर्ट से साफ है कि राशन की कालाबाजारी में अफसरों का सिंडिकेट काम कर रहा था।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
