बेगूसराय में ट्रेन से गिरकर समस्तीपुर के युवक की मौत:छह महीना पहले हुई थी शादी
बेगूसराय-खगड़िया रेलखंड पर ट्रेन से गिरकर एक युवक की मौत हो गई। इसी साल छह महीने पहले उसकी शादी हुई थी। मृतक की पहचान समस्तीपुर जिले के मुजौना गांव निवासी जालिम पासवान के पुत्र नरेश कुमार पासवान (23) के तौर पर हुई है। नरेश यशवंतपुर-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस से घर लौट रहा था।नरेश अपने घर का सबसे छोटा बेटा था। तीन भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटे नरेश पर पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी का बोझ था। उसके पिता जालिम पासवान खुद मजदूरी करके किसी तरह घर का गुजर-बसर करते हैं। घटना लाखो स्टेशन से 200 मीटर पश्चिम पोल नंबर-157 के पास की है।
नरेश अपने घर का सबसे छोटा बेटा था। तीन भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटे नरेश पर पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी का बोझ था। उसके पिता जालिम पासवान खुद मजदूरी करके किसी तरह घर का गुजर-बसर करते हैं। नरेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने और अपनी नई जिंदगी की शुरुआत के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी।इसी साल अप्रैल महीने में उसकी शादी विभा कुमारी से हुई थी। शादी के बाद अगस्त के महीने में वह अपनी दुल्हन और बूढ़े मां-पिता को घर पर छोड़कर कमाई करने के लिए बेंगलुरु चला गया था।
वहां वह गांव के ही दो दोस्तों के साथ राजमिस्त्री के साथ लेबर का काम करने लगा। जिससे कुछ पैसे इकट्ठा करके अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी दे सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
बेंगलुरु में चार दिन पहले ही काम खत्म हो गया। काम बंद होने के बाद नरेश ने घर पर फोन करके मां-पिता और अपनी पत्नी को इसकी जानकारी दी। आने वाले दुर्गा पूजा के त्योहार को देखते हुए परिवार वालों के चेहरे पर खुशी आ गई। मां-पिता और पत्नी ने कहा कि पूजा का समय आ रहा है।घर में छागर (खस्सी) की बलि भी देनी है और जब काम बंद ही हो गया है तो वहां रुककर क्या करोगे, घर चले आओ। परिवार का बुलावा सुनते ही नरेश की आंखों में अपने गांव लौटने और अपनों से मिलने की खुशी तैर गई। उसने तुरंत अपने दोस्तों के साथ घर वापसी की तैयारी की और ट्रेन नंबर 15227 यशवंतपुर-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस में सवार हो गया।
इसी दौरान अहले सुबह करीब 3 बजे जब ट्रेन बेगूसराय के लाखो स्टेशन के करीब से गुजर रही थी, नरेश ने अपने साथी दोस्तों से शौचालय जाने की बात कही और अपनी सीट से उठकर बोगी के दरवाजे की तरफ बढ़ गया। कुछ मिनट बीत जाने के बाद भी जब नरेश वापस नहीं लौटा, तो उसके साथ सफर कर रहे दोस्त दीपक कुमार को अनहोनी की आशंका हुई।
दीपक जब उसे तलाशते हुए बोगी के दरवाजे की ओर गया तो वहां नरेश मौजूद नहीं था। दरवाजे पर बैठे एक अन्य यात्री ने बताया कि जो युवक शौचालय की तरफ आया था, वह अचानक अनियंत्रित होकर ट्रेन के खुले दरवाजे से नीचे गिर गया। इसके बाद दीपक और उसके साथी ने तुरंत वैक्यूम जंजीर खींचकर गाड़ी को रोका।
दोस्त ट्रेन से नीचे उतरे और घने अंधेरे में रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे पीछे की ओर दौड़ने लगे। करीब एक किलोमीटर तक बदहवास दौड़ने के बाद जब वे लाखो स्टेशन से 200 मीटर पश्चिम पोल नंबर-157 के पास पहुंचे, तो वहां नरेश का रक्तरंजित शव पड़ा मिला। ट्रेन से गिरने के कारण उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
