Begusarai

बेगूसराय में बेहोश कैदी को गोद में ले 200 मी. दौड़ा सिपाही, बची जान

बेगूसराय.सिविल कोर्ट परिसर में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पुलिस की संवेदनशील छवि को सामने ला दिया। पेशी के दौरान एक कैदी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। अस्पताल पहुंचने पर जब तत्काल स्ट्रेचर नहीं मिला तो ड्यूटी पर तैनात सिपाही अनिल कुमार ने उसे अपनी गोद में उठाया और इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाया। उनकी तत्परता से समय रहते कैदी का इलाज शुरू हो सका।

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जानकारी के अनुसार बरौनी थाना क्षेत्र के मोसादपुर निवासी करण कुमार पिछले करीब पांच महीने से जेल में बंद है। गुरुवार को उसे एससी-एसटी कोर्ट में पेशी के लिए बेगूसराय सिविल कोर्ट लाया गया था। न्यायालय परिसर में कुछ देर रहने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात सिपाही अनिल कुमार ने तत्काल पहल की। अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से बेहोश कैदी को न्यायालय की तीसरी मंजिल से नीचे लाया गया। इसके बाद बिना समय गंवाए उसे ई-रिक्शा से सदर अस्पताल पहुंचाया गया।

 

अस्पताल में भी चुनौती खत्म नहीं हुई। इमरजेंसी के बाहर तत्काल स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में सिपाही अनिल कुमार ने इंतजार करने के बजाय बेहोश कैदी को अपनी गोद में उठाया और करीब 200 मीटर दूर स्थित इमरजेंसी वार्ड तक ले गए। वहां चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया।

 

करण कुमार की बहन ने बताया कि रुपए के लेन-देन से जुड़े एक मामले में उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। अदालत से जमानत मिलने के बावजूद जमानत राशि जमा नहीं होने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार करण कुमार पहले भी विवादों में रह चुका है। उसे कथित तौर पर डीएसपी की वर्दी पहनकर रील बनाने और सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा फर्जी डीएसपी बनकर दरोगा बनाने का झांसा देकर एक छात्र से लाखों रुपये की ठगी के आरोप में भी वह जेल भेजा जा चुका है। इसी मामले में पेशी के लिए उसे गुरुवार को कोर्ट लाया गया था।

 

चर्चा में रही सिपाही की संवेदनशीलता

 

अस्पताल और न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों के बीच पूरे दिन सिपाही अनिल कुमार की चर्चा होती रही। लोगों का कहना था कि वर्दी की असली पहचान केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर मानवीय संवेदनाएं दिखाना भी है। एक ओर जहां कैदी का आपराधिक अतीत चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर एक सिपाही की इंसानियत लोगों का दिल जीत गई।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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