Muzaffarpur

शिविर में दिव्यांग को मिली ट्राईसाइकिल, रास्ते में हुई खराब:बाइक में बांध कर गमछे के सहारे पहुंचे

मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर उजागर हुआ है। मंगलवार को रामप्यारी उच्च विद्यालय में दिव्यांगों के लिए एक विशेष सहयोग शिविर का आयोजन किया गया था, जिसका उद्देश्य उन्हें सरकारी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराना था। हालांकि, इस शिविर में एक दिव्यांग को मिली ट्राईसाइकिल रास्ते में खराब हो गई, जिससे उसे घंटों धूप में परेशान होना पड़ा।

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बोचहां प्रखंड के धनुषी गांव निवासी दिव्यांग सुरेंद्र कुमार भी इस शिविर में बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंचे थे। अधिकारियों ने उन्हें एक नई बैटरी चालित ट्राईसाइकिल सौंपी। सरकारी सहायता मिलने पर सुरेंद्र कुमार काफी खुश थे, उन्हें लगा कि अब उनकी आवाजाही आसान हो जाएगी और उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

 

कुछ ही दूरी पर ट्राईसाइकिल हुई खराब

 

हालांकि, विद्यालय परिसर (शिविर स्थल) से घर के लिए रवाना होते ही कुछ ही दूरी पर ट्राईसाइकिल में तकनीकी खराबी आ गई। नई बैटरी चालित ट्राईसाइकिल बीच रास्ते में ही अचानक बंद हो गई और आगे बढ़ने में असमर्थ हो गई।इसके बाद दिव्यांग सुरेंद्र कुमार खराब ट्राईसाइकिल के साथ विद्यालय परिसर के ठीक बाहर, चिलचिलाती धूप में घंटों परेशान बैठे रहे। अंततः, उन्हें गमछे और बाइक के सहारे अपने घर पहुंचना पड़ा।

 

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, वहां से गुजर रहे और मौके पर मौजूद कई अधिकारियों व कर्मियों की नजर इस बेबस दिव्यांग पर पड़ी। वे देख रहे थे कि एक व्यक्ति नई गाड़ी के साथ धूप में बेहाल है, लेकिन किसी ने भी उसे तत्काल मदद पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। मौके पर तकनीकी खराबी को दूर करने या पीड़ित को घर तक छुड़वाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद नहीं थी। लाचार सुरेंद्र कुमार खराब वाहन के साथ ही किसी तरह घर लौटने का रास्ता तलाशते रहे और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

 

सुरेंद्र कुमार को इस तरह तड़पता देख एक स्थानीय युवक मदद के लिए आगे आया। उसने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपनी मोटरसाइकिल निकाली और उसमें अपना लाल गमछा बांधकर ट्राईसाइकिल को रस्सी की तरह खींचने का देसी जुगाड़ तैयार किया।

 

स्थानीय बोले- उपकरणों की गुणवत्ता बेहद घटिया

 

युवक ने उस खराब गाड़ी को बाइक के सहारे धीरे-धीरे खींचते हुए सुरेंद्र कुमार को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाया। बीच सड़क पर गमछे के सहारे खिंचती सरकारी योजना की इस तस्वीर को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया। यह पूरा दृश्य इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत बांटे जाने वाले उपकरणों की गुणवत्ता बेहद घटिया है। साथ ही, वितरण के बाद लाभुकों को होने वाली समस्याओं के लिए मौके पर बैकअप टीम या मैकेनिक की व्यवस्था न होना प्रशासनिक घोर लापरवाही को दर्शाता है।

 

बीडीओ बोलीं- ट्राई साइकिल को ठीक कराया जाएगा

 

इस पूरे मामले पर जब बोचहां की प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रिया कुमारी से बात की गई, तो उन्होंने कहा है कि “सभी बैटरी चालित ट्राईसाइकिलें मंगलवार को ही जिला मुख्यालय से मंगवाई गई थीं। ऐसी संभावना है कि जिला मुख्यालय से बोचहां लाने के दौरान (परिवहन के वक्त) गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी आ गई हो।”

 

बीडीओ ने आगे स्वीकार किया कि कुछ अन्य ट्राईसाइकिलों में पंक्चर की समस्या भी सामने आई थी, जिसे मौके पर ही ठीक करवा दिया गया था। उन्होंने सुरेंद्र कुमार के मामले पर आश्वासन देते हुए कहा कि खराब ट्राईसाइकिल को जल्द ही मैकेनिक भेजकर पूरी तरह ठीक करवा दिया जाएगा, ताकि लाभुक को आगे किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद, मुजफ्फरपुर की इस घटना ने सरकारी शिविरों की जमीनी तैयारी और संवेदनशीलता की पोल खोलकर रख दी है।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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