Samastipur

समस्तीपुर:जेडीयू विधायक ने उठाया पानी में यूरेनियम का मुद्दा

समस्तीपुर के वारिसनगर से जेडीयू विधायक मांजरिक मृणाल ने पानी में मिले यूरेनियम का मुद्दा विधानसभा में उठाया है। सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि एम्स दिल्ली और सहयोगी वैज्ञानिक टीम की ओर से किए गए तीन साल के लंबे अध्ययन में शामिल सभी 40 नमूनों में यूरेनियम की उपस्थिति दर्ज की गई। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है।

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दूध में यूरेनियम मिलने का मतलब है कि यहां के पानी में भी यूरेनियम है। जिससे मनुष्य के साथ ही पशु और जो अनाज का हम सेवन कर रहे हैं उन सभी में इसी मात्रा उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में वारिसनगर के साथ संपूर्ण जिले के पानी का वैज्ञानिक जल परीक्षण जरूरी है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसकी मात्रा की क्या स्थिति है। लोग इससे कैसे बचें। वारिसनगर विधायक ने सोमवार को शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया था। जिस पर अभी सरकार का जबाव नहीं आया है।

 

साइंटिस्ट विधायक ने विधानसभा में सरकार को बताया है कि बिहार के कुछ क्षेत्रों में भूजल में यूरेनियम पाया गया है और कुछ जगहों पर इसकी मात्रा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई है। यह एक गंभीर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य का विषय है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है.सबसे चिंता की बात यह है कि हाल ही के अध्ययन में कुछ स्थानों पर माताओं के ब्रेस्ट मिल्क में भी यूरेनियम की उपस्थिति पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरेनियम मिल्क प्रोटीन के साथ ज्यादा मजबूती से बाइंड नहीं करता। इसका मतलब यह है कि ब्रेस्ट मिल्क में जो मात्रा दिखती है, वह शरीर में मौजूद कुल यूरेनियम का पूरा चित्र नहीं हो सकती। वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो यूरेनियम समय के साथ किडनी और हड्डियों में जमा हो सकता है। इसलिए लंबे समय तक एक्सपोज़र रहने पर शरीर के अंदर इसकी वास्तविक मात्रा अधिक हो सकती है।

 

हालांकि अभी तत्काल कैंसर का खतरा कम बताया जा रहा है, लेकिन लंबे समय तक संपर्क रहने पर किडनी की समस्या और हड्डियों पर असर पड़ सकता है, खासकर बच्चों और कमजोर वर्गों पर।इसलिए मेरा मानना है कि हमें विस्तृत बायोमेडिकल स्टडीज़ करनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मानव शरीर में वास्तविक कंटैमिनेशन कितना है। साथ ही हमें कंटैमिनेशन के रूट कॉज़ को भी वैज्ञानिक तरीके से समझना होगा, क्या यह पूरी तरह जियोलॉजिकल कारणों से है या ग्राउंडवॉटर ओवर-एक्सट्रैक्शन और एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज़ ने इसे बढ़ाया है।

 

मैं सरकार से औपचारिक रूप से मांग करता हूँ कि तुरंत एक एक्सपर्ट टास्क फोर्स बनाई जाए, जिसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स, मेडिकल एक्सपर्ट्स, एनवायरनमेंटल साइंटिस्ट्स और पब्लिक हेल्थ ऑफिशियल्स शामिल हों। यह टास्क फोर्स सिस्टमैटिक वॉटर टेस्टिंग, ह्यूमन बायोमॉनिटरिंग, सोर्स एनालिसिस और टाइम-बाउंड मिटिगेशन प्लान तैयार करे।यह घबराहट फैलाने का विषय नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी से और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य करने का समय है। सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मूल अधिकार है, और हमें इस मुद्दे पर तुरंत, पारदर्शी और गंभीर कार्रवाई करनी चाहिए।

 

अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच शोध

 

पिछले दिनों बिहार के छह जिलों जिसमें समस्तीपुर के साथ ही भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम (U-238) की मौजूदगी पाई गई थी। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है। अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किया गया था। शोध में पाया गया कि कटिहार जिले के एक नमूने में यूरेनियम का स्तर सबसे अधिक था।

 

खगड़िया में औसत स्तर उच्चतम पाया गया। नालंदा, समस्तीपुर में यूरेनियम की मात्रा न्यूनतम दर्ज हुई। दूध के नमूनों में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही। वैज्ञानिकों के अनुसार सभी नमूनों में U-238 की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि इन जिलों के भूजल में भारी धातु संदूषण की समस्या मौजूद है।

 

पेयजल में WHO का मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है, जबकि जर्मनी में यह सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय है। भारत के 18 राज्यों के 151 जिलों में किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि बिहार में लगभग 1.7% भूजल स्रोत यूरेनियम से प्रभावित हैं।

 

विधायक के बारे में जानिए

 

समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड के कटघरा गांव में जन्मे मांजरिक मृणाल के पिता अशोक कुमार 2005 से 2025 तक विधायक रहे। हमेशा से शिक्षा को प्राथमिकता दी। परिणाम यह हुआ कि गांव का एक लड़का टेक्सास यूनिवर्सिटी जैसा प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंच गया। 2021 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा पूरी की।कुछ समय बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे संस्थान में शोध कार्य शुरू किया। गांव की मिट्टी से लेकर दुनिया की उन्नत प्रयोगशालाओं तक का सफर तय किया। वह भारतीय विज्ञान संस्थान की नौकरी छोड़कर वापस घर लौटने के बाद गत विधानसभा चुनाव को जीत दर्ज की।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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