बीएचईएल छोड़ गोपेश अब अंतरिक्ष मिशन में देंगे योगदान:इसरो में 90वीं रैंक
पटना.भागलपुर,आईआईआईटी भागलपुर के पूर्व छात्र गोपेश कृष्ण यादव ने इसरो की वैज्ञानिक (मैकेनिकल) भर्ती परीक्षा में ऑल इंडिया 90वीं हासिल की है। आईआईआईटी भागलपुर में मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में 2018-22 बैच के छात्र रहे गोपेश ने अपनी तकनीकी क्षमता और लगातार मेहनत के दम पर यह सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के बाद अब वे देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो में योगदान देंगे।
आईआईआईटी भागलपुर के रजिस्ट्रार डॉ. धीरज सिन्हा ने बताया कि गोपेश पिछले एक साल से महारत्न सार्वजनिक उपक्रम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने मैकेनिकल, प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग साइंसेज जैसी चार अलग-अलग स्ट्रीम में नौ बार गेट परीक्षा क्वालिफाई की है। पढ़ाई के दौरान उन्हें आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी प्रवेश मिला था। गोपेश की सफलता पर निदेशक, शिक्षकों और संस्थान के सदस्यों ने बधाई दी है। संस्थान प्रशासन ने उनकी उपलब्धि को वर्तमान छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बताया और उम्मीद जताई कि वे इसरो में देश के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष अभियानों में अहम योगदान देंगे।
मेकाट्रॉनिक्स के कोर्स से सफलता पाने में मिली मदद मेकाट्रॉनिक्स केवल एक पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखा नहीं है, बल्कि यह मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंट्रोल सिस्टम और कंप्यूटर साइंस का एक आधुनिक समेकित रूप है। चार शाखाओं में गेट निकालना आसान हुआ, क्योंकि पाठ्यक्रम में थर्मोडायनामिक्स, फ्लुइड मैकेनिक्स, स्ट्रेंथ ऑफ मैटेरियल्स (मैकेनिकल), कंट्रोल थ्योरी, डायनेमिक्स और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस (प्रोडक्शन) जैसे विषय एक साथ पढ़ाए जाते हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान और सैटेलाइट रॉकेट निर्माण में कभी भी सिर्फ शुद्ध मैकेनिकल या सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स की जरूरत नहीं होती। ऑटोमेशन, सेंसर्स, एक्चुएटर्स और रोबोटिक्स के कांसेप्ट ने उन्हें इसरो की वैज्ञानिक परीक्षा के कोर और व्यावहारिक सवालों में बढ़त दिलाई।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
