डेढ़ घंटे तक होते रहे 50 धमाके:बिहार में 5 मौतों की आंखोंदेखी
पटना.सिवान.हम लोग शाम को गाय-भैंस को चारा देने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान 500 मीटर दूर अमीरुद्दीन के पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ। हम लोगों ने सोचा कि दीवाली के लिए एक दो पटाखे जलाकर टेस्ट कर रहे होंगे, लेकिन अचानक दूसरा, फिर तीसरा धमाका हुआ। डेढ़ घंटे तक एक के बाद एक धमाके होते रहे। धुआं और धमाकों का शोर जब थमा तो हम लोग घटनास्थल पर पहुंचे। पता चला कि पटाखा फैक्ट्री के मालिक अमरुद्दीन, उसकी पत्नी और दो पोतियों और एक नाती की मौत हो गई। उनके शवों के लोथड़े 500 मीटर दूर तक बिखरे मिले।’
सीवान के जामो थाना क्षेत्र के आलमापुर गांव के रहने वाले जुनैद रिजवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही।
ब्लास्ट की सूचना के बाद सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो, गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। एसपी भारत सोनी ने कहा कि 20 साल पुराना लाइसेंस था। उसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उधर, लापरवाही बरतने के आरोप में, सीवान के एसपी ने जामो बाजार थाना प्रभारी धीरज कुमार और स्थानीय चौकीदार द्वारिका मांझी को तुरंत निलंबित कर दिया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और घटना की हर पहलू से जांच के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शी जुनैद रिजवी ने बताया कि हमारे गांव से पूरे बिहार में दीवाली, दुर्गापूजा, शादी और ब्याह में पटाखों की बिक्री की जाती है। कारोबारी हर साल लाखों रुपए का ऑर्डर देकर पटाखा तैयार कराते हैं, ऑर्डर पर सप्लाई की जाती है। दुर्गापूजा में भी यहां से कई जिलों में पटाखों की सप्लाई की गई थी। अब दीवाली के लिए अमरुद्दीन ने कारीगरों से भारी मात्रा में पटाखे तैयार कराए थे। यही वजह है कि करीब एक से डेढ़ घंटे तक धमाके होते रहे।
धमाके इतने तेज थे कि डर की वजह से कोई फैक्ट्री के पास जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। करीब 6 बजे के आसपास जब धमाकों का शोर थमा तब हम लोगों के साथ-साथ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंची।आशंका है कि बारुद के फटने से घटना हुई है। धमाकों की तीव्रता इतनी थी कि किसी की खोपड़ी तो किसी के हाथ का एक हिस्सा और एक पैर करीब 500 मीटर दूर मिला। हम लोगों ने इस तरह की घटना की कल्पना भी नहीं की थी।
पहले कई बड़े धमाके हुए, फिर छोटे-छोटे ब्लास्ट
हमारे गांव में दशकों से पटाखा बनाने का काम होता था, कुछ छोटी-बड़ी घटनाएं पहले हुई थी, लेकिन ये घटना हमारे लिए त्रासदी की तरह है। मुझे नहीं लगता कि घटना के बाद कोई भी गांव में या जिले में पटाखा की फैक्ट्री लगाने की भी सोचेगा।ये कहना मुश्किल है कि कितने लोगों की मौत हुई है। अमरुद्दीन के घर के आसपास के घरों में भी बारुद का धुआं घुस गया था। आशंका है कि आसपास के गांव के कुछ कारीगर पटाखा फैक्ट्री में काम करते थे, उनमें से भी कुछ लोगों की मौत की आशंका है।
घटना की जानकारी के बाद पहुंचे फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। करीब दो घंटे तक आग के ठंडा होने का इंतजार किया जा रहा था। पहले कई बड़े धमाके हुए, फिर छोटे-छोटे कई ब्लास्ट हुए। हम लोगों की आशंका है कि अंदर कुछ घायल लोग भी हो सकते हैं।
धमाकों के बाद घटनास्थल पर पहुंची मेडिकल टीम ने अमरुद्दीन, उसकी पत्नी, उनके दो दो पोतियों और एक नाती और एक महिला की लाश के करीब 10 से अधिक टुकड़ों को इक्ट्ठा किया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।बताया जा रहा है कि लाश के टुकड़े 500 मीटर के दायरे में बिखरे थे। मेडिकल टीम के पहुंचने तक गांव में अंधेरा हो चुका था। लाश के टुकड़ों को खोजने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
दो मंजिला मकान 20 मिनट में मलबे में तब्दील
धमाके के ठीक बाद जब भास्कर रिपोर्टर ग्राउंड जीरो पर पहुंचे, तो पता चला कि अमरुद्दीन का 2 मंजिला घर और पटाखा फैक्ट्री 20 मिनट में मलबे में तब्दील हो चुकी थी।आसपास के लोगों ने बताया कि धमाके के कारण मकान के भीतर काम कर रहे फैक्ट्री मालिक अमीरुद्दीन और उनकी दो-दो पोतियों और एक नाती के शव उड़कर इमारत के बाहर सड़क पर जा गिरे।
शवों की स्थिति इतनी वीभत्स थी कि उन्हें सीधे तौर पर पहचान पाना मुश्किल था। आसपास के दीवारों पर खून के छींटे और जले हुए कपड़ों के चिथड़े चिपके दिखाई दे रहे थे।दो मंजिला इमारत के नाम पर अब केवल कंक्रीट, ईंटों और लोहे की छड़ों का मलबा बचा है। आसपास के करीब आधा दर्जन मकानों की खिड़कियों के कांच टूटकर बिखर गए हैं, जबकि कई दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं।
कुछ लोगों ने बताया कि धमाकों के बाद पूरे गांव में गंधक, पोटाश और जले हुए कागज का धुंआ इस कदर फैला हुआ था कि आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही थी।
4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुझी आग
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहला बड़ा धमाका होते ही पूरे गांव में अफरातफरी मच गई। मकान के अंदर बड़ी मात्रा में रखा कच्चा बारूद और तैयार पटाखों का जखीरा एक के बाद एक फटने लगा। करीब डेढ़ घंटे तक रह-रहकर छोटे-बड़े धमाके होते रहे।रुक-रुक कर हो रहे विस्फोटों के कारण शुरुआत में स्थानीय ग्रामीण राहत और बचाव कार्य के लिए पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
जैसे ही एक धमाका शांत होता, लोग मलबे की तरफ दौड़ते, लेकिन अगला धमाका होते ही जान बचाकर पीछे भागना पड़ रहा था। लगभग 4 घंटे तक लगातार पानी की बौछार करने के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया।घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार, सीवान के डीएम विजय प्रकाश मीणा, एसपी भारत सोनी, सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता और महाराजगंज एसडीपीओ अमन ग्राउंड जीरो पर पहुंचे।
पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को बैरिकेड कर सील कर दिया है, ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। सारण के डीआईजी नीलेश कुमार ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है।
अब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और बम निरोधक दस्ते की टीम क्राइम सीन का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगी। FSL की टीम मलबे से रासायनिक अवशेष, सल्फर, पोटाश और बारूद के सैंपल एकत्र कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तीव्रता का विस्फोटक इस्तेमाल किया जा रहा था।
एसपी भारत सोनी ने जानकारी दी कि जिस जगह पटाखा बनाया जा रहा था, उसके पास 20 साल पुराना लाइसेंस होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या लाइसेंस रिन्यू था, क्या तय सीमा से अधिक मात्रा में विस्फोटक रखा गया था और क्या घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह की गतिविधि सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
