फतुहा में प्लास्टिक रीसाइकलिंग फैक्ट्री लगेगी:फर्नीचर बनाने से 9 हजार को रोजगार
“फतुहा में प्लास्टिक कचरे से फर्नीचर बनाया जाएगा। इसके लिए नई वेस्ट-टू-वेल्थ रीसाइकलिंग फैक्ट्री लगेगी। इसमें हर दिन 10 से 14 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर कुर्सियां, मेज, डाइनिंग टेबल, बेंच, बाल्टी और इंटरलॉकिंग टाइल्स जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस संयंत्र के शुरू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 9 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इस फैक्ट्री के चालू होने से लैंडफिल साइट्स और प्राकृतिक जलस्रोतों पर प्लास्टिक कचरे का बोझ घटेगा।
संयंत्र में सिंगल-यूज और कम गुणवत्ता वाले रिजेक्टेड प्लास्टिक को रीसाइकिल कर टिकाऊ सामान बनाया जाएगा। 20 लीटर की एक बाल्टी बनाने में 2 से 3 किलोग्राम प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जबकि एक मजबूत बेंच तैयार करने में कम से कम 40 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे की खपत होगी। वर्तमान में शहरों के डंपिंग यार्ड में 60% से अधिक हिस्सा नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का है, जो नालों को जाम करने, पशुओं की मौत और मिट्टी-भूजल को बंजर व जहरीला बनाने का मुख्य कारण है।
जोन और जिलावार फैक्ट्री लगाने की योजना, कबाड़ चुनने वालों को सीधा भुगतान होगा
कचरा बीनने वालों और कबाड़ व्यापारियों को सप्लाई चेन से जोड़ा जाएगा। उन्हें कचरे का उचित मूल्य सीधे बैंक खातों में दिया जाएगा।
डोर-टू-डोर ड्राई वेस्ट कलेक्शन और प्राइमरी सेग्रीगेशन का जिम्मा महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाएगा।
सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों और पार्कों के लिए कम लागत में वाटरप्रूफ और टरमाइट-प्रूफ मजबूत फर्नीचर मिलेगा।
नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक से मुक्ति िमलेगी। नाला जाम नहीं होगा। भूमिगत जल प्रदषित नहीं होगा।
बिहार में पहले जोन और फिर जिलावार नई वेस्ट-टू-वेल्थ रीसाइकलिंग फैक्ट्री लगाई जाएगी। फतुहा से पहले सीतामढ़ी में फैक्ट्री खोली गई है। इसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में की थी। सीतामढ़ी के बाद अब फतुहा और आगे चलकर बिहार के अन्य जिलों व जोनों में भी ऐसी फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी।
चार चरणों में कचरे से तैयार होंगे टिकाऊ उत्पाद
कलेक्शन व सेग्रीगेशन : घरों, होटलों और डंपिंग ग्राउंड्स से एकत्र कचरे को ऑटोमेटेड सेंसर और मैन्युअल सॉर्टिंग से एचडीपीई, एलडीपीई और पॉलीप्रोपाइलीन में छांटा जाएगा।
कटिंग व वाशिंग : छांटे गए प्लास्टिक को छोटे टुकड़ों में काटकर री-सर्कुलेटेड वाटर यूनिट में रसायनों से धोया जाएगा, ताकि धूल व ग्रीस हट सके।
मेल्टिंग व पैलेट्स बनाना : साफ टुकड़ों को नियंत्रित तापमान पर पिघलाकर बेहद मजबूत प्लास्टिक दाने (पैलेट्स) बनाए जाएंगे।
मोल्डिंग व ढलाई : इन दानों को डाई और मोल्डिंग मशीनों में उच्च दबाव पर डालकर कुर्सियां, बेंच, टेबल व टाइल्स बनाई जाएंगी।
कोट फतुहा में प्लास्टिक से फर्नीचर और अन्य वस्तुएं बनाने के लिए फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इससे नए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और प्लास्टिक प्रदूषण से निजात मिलेगा। – कुंदन कुमार, सचिव, उद्योग विभाग
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
