Samastipur

“भागवत कथा :घोर कलयुग से बचने का सबसे उत्तम उपाय है भगवान की भक्ति :आस्था

समस्तीपुर. पटोरी।घोर कलयुग से बचने का सबसे उत्तम उपाय है भगवान की भक्ति, सत्य और धर्म के पथ पर चलना होगा। ये बातें भागवत कथा के तीसरे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या भागवत भास्कर आस्था भारती ने कथा के दौरान कही। कथा की शुरुआत श्राप के बाद राजा परीक्षित एवं सुखदेव प्रसंग के दौरान उन्होंने कहा यह मेरा सौभाग्य है कि देवतुल्य ऋषियों के दर्शन प्राप्त हुए। अब मैं अपने जीवन के शेष सात दिनों का सदुपयोग करना चाहता हूं। ज्ञान प्राप्ति और भगवत भक्ति में समय बिताना चाहता हूं। कृपया मुझे वह सरल मार्ग बताइए जिससे मैं भगवान को प्राप्त कर सकूं। राजा परीक्षित की बात सुनकर ऋषि प्रसन्न हुए। उन्होंने उनकी इच्छा पूरी करने का निश्चय किया। तभी वहां व्यास ऋषि के पुत्र, परम ज्ञानी ऋषि शुकदेव पहुंचे जो जन्म और मृत्यु से मुक्त थे। राजा परीक्षित सहित सभी ऋषि उनके सम्मान में खड़े हो गए। राजा परीक्षित ने उन्हें प्रणाम करते विनम्र भाव से आशन पर बैठने के लिए आग्रह किया। उनके बैठने के बाद अन्य ऋषि भी अपने-अपने आसन पर बैठ गए। इसके बाद राजा परीक्षित ने कहा कि जैसे भगवान नारायण के सामने दैत्य भाग जाते हैं, वैसे ही आपके आगमन से पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

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कृपया बताइए, मृत्यु के निकट व्यक्ति को क्या करना चाहिए। कथा में आगे कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग में बताया कि वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव से हुआ। एक दिन कंस अपनी बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस, जिस देवकी को तू प्रेम से ले जा रहा है, उसी के गर्भ से जन्मा आठवां पुत्र तेरा वध करेगा। यह सुनते ही कंस वसुदेव को मारने को तैयार हो गया।

आधी रात को जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तभी यशोदा के गर्भ से दिव्य कन्या ने जन्म लिया वसुदेव-देवकी के सात संतानें जन्मीं सभी को कंस ने को मार डाला। अब आठवां पुत्र जन्म लेने वाला था। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी संतान होने वाली थी। आधी रात को जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तभी यशोदा के गर्भ से एक कन्या ने जन्म लिया। देवकी-वसुदेव की कोठरी में अचानक प्रकाश हुआ। भगवान चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए।

वसुदेव नवजात श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागार से निकले। वे नंदजी के घर पहुंचे और श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर कन्या को लेकर लौट आए। कारागृह के फाटक फिर से बंद हो गए। सुबह हो कर कंस को सूचना मिली कि देवकी ने संतान को जन्म दिया है। वह कारागार पहुंचा और नवजात कन्या को उठाकर पटकने लगा। तभी कन्या आकाश में उड़ गई और बोली कि तुझे मारने वाला वृंदावन पहुंच चुका है।

Anjali Kumari

News to bihar Editer works. I am 5 year News website works Experience.

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