“7 अप्रैल को बेगूसराय आएंगे राहुल गांधी:कन्हैया के साथ पदयात्रा में शामिल होंगे
बेगूसराय.लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 7 अप्रैल को बेगूसराय में NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार की पलायन रोको-नौकरी दो पदयात्रा में शामिल होंगे। राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर तैयारी तेज कर दी गई है। पूरा बेगूसराय शहर और पदयात्रा के रूट पर होर्डिंग लगाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी 7 मार्च को सुबह 9:00 बजे बेगूसराय के आईटीआई मैदान में हेलीकॉप्टर से उतरेंगे। इसके बाद वह कन्हैया कुमार के साथ पलायन रोको नौकरी दो पदयात्रा में शामिल होंगे। करीब 1 किलोमीटर की यात्रा के दौरान राहुल गांधी नुक्कड़ सभा को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद उलाव से हवाई मार्ग से पटना के लिए रवाना हो जाएंगे।राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है तो कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। कन्हैया कुमार की पदयात्रा में जब 7 अप्रैल को गृह जिला बेगूसराय पहुंच रही है तो इसमें एक बदलाव देखने को मिल रहा है। लगाए गए होर्डिंग में नारा दिया गया है हमारा संकल्प जन्मभूमि को कर्मभूमि में बदलना है।
जगह-जगह लगाए जा रहे होर्डिंग्स
जगह-जगह लगाए जा रहे होर्डिंग्स के बाद इस नारा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में गिरिराज सिंह से हार चुके कन्हैया कुमार 2025 का विधानसभा चुनाव बेगूसराय से चुनाव लड़ सकते हैं। इससे एक ओर महागठबंधन के सहयोगी दलों पर दबाव बनेगा।दूसरी ओर बहुमत आने की स्थिति में कांग्रेस कन्हैया कुमार पर सीएम पद का दांव खेल सकती है। राजनीतिक हलकों में कयास लगाया जा रहा है कि बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित बड़े बदलाव के बाद अब कांग्रेस बिहार में इसी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में कोई बड़ा गेम खेल सकती है। इसके लिए पूरी जिम्मेदारी बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरु को दी गई है।
बिहार में बेरोजगारी और पलायन एक बड़ी समस्या है
बिहार में बेरोजगारी और पलायन एक बड़ी समस्या है और इन समस्या को लेकर कन्हैया कुमार पदयात्रा कर रहे हैं, जिसे भरपूर समर्थन में जन समर्थन मिल रहा है। पदयात्रा के दौरान कन्हैया जब अपने गृह जिला बेगूसराय आएंगे तो उसे पदयात्रा में राहुल गांधी का शामिल होना कोई बड़ा संदेश दे रहा है।इधर, राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की आपात बैठक शनिवार को कांग्रेस भवन में बुलाई गई। जिसमें राहुल गांधी के कार्यक्रम और पदयात्रा के रूट आईटीआई मैदान से वीर कुंवर सिंह चौक, फ्लाई ओवर, बस स्टैंड, पावर हाउस चौक, सुभाष चौक, हर-हर महादेव चौक, जीरोमाइल, बीहट होते हुए सिमरिया पुल से पटना की ओर प्रस्थान करने पर चर्चा होगी।
राहुल गांधी का कन्हैया की पदयात्रा में आना संयोग नहीं
राजनीतिक गतिविधियों पर संवेदनशील वरिष्ठ पत्रकार महेश भारती कहते हैं कि राहुल गांधी का कन्हैया की पदयात्रा में बेगूसराय आना महज एक संजोग नहीं है। सात अप्रैल को कांग्रेस के सबसे बड़े और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बेगूसराय आ रहे हैं। वे जेएनयू कैंपस से चर्चित बेगूसराय के ही बीहट गांव निवासी कन्हैया कुमार की पदयात्रा का उत्साह बढ़ाने आ रहे हैं।
कन्हैया ने 2019 में बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव सीपीआई के टिकट पर लड़ा था। लेकिन, उन्हें भाजपा के कद्दावर नेता गिरिराज सिंह से पराजित होना पड़ा। बाद में सीपीआई में बनावट नहीं होने और राजनीतिक करियर के उफान पूरा करने के लिए कन्हैया कांग्रेस के राहुल ब्रिगेड में शामिल हो गए। 2024 का लोकसभा चुनाव उन्होंने दिल्ली के एक संसदीय क्षेत्र से लड़ा और पराजित होना पड़ा।पिछले महीने से उन्होंने बिहार में पलायन रोको-नौकरी दो पदयात्रा शुरू की। बिहार के जिलों सहित वे युवाओं और कांग्रेसियों की टीम के साथ गुजर चुके हैं।
बेगूसराय राजनीतिक रूप से जागरूक और संवेदनशील जिला
बेगूसराय राजनीतिक रूप से जागरूक और संवेदनशील जिला रहा है। आजादी के बाद के संसदीय इतिहास में इस जिले ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर के की नेता दिए हैं। कांग्रेस के रामचरित्र बाबू आजादी से पहले ही बिहार लेजिस्लेटिव कांउसिल के मेंबर बन चुके थे। वे बिहार-झारखंड-उड़ीसा के प्रथम एमएससी थे।प्राध्यापक की नौकरी छोड़कर उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और आजादी बाद तेघड़ा से एमएलए चुनकर बिहार के प्रथम विद्युत सिंचाई मंत्री बने। बाद के दिनों में उनके बेटे चंदशेखर सिंह सीपीआई के उत्तर भारत के प्रथम एमएलए बने और सीपीआई के बड़े नेता हुए। स्वतंत्रता आंदोलन के बाद बेगूसराय के विधायक और सांसद कांग्रेस पार्टी के नेता ही बनते रहे।उनमें मथुरा प्रसाद मिश्र, ब्रह्मदेव सिंह, मिटठन चौधरी, हरिहर महतो, भोला सिंह, रामदेव राय, प्रमोद कुमार शर्मा, मेदनी पासवान आदि थे।
कांग्रेस का 1990 तक प्रभाव रहा
कांग्रेस बेगूसराय में एक सशक्त संगठन और प्रभाव 1990 तक बना रहा, लेकिन 1990 में जनता दल और कम्युनिस्ट पार्टी के गठजोड़ से कांग्रेस पराजित होती गई और तब से लगातार गठजोड़ का खामियाजा भुगतते कांग्रेस को हार ही हार मिलती रही।2015 में राजद गठजोड़ की वजह से इसके दो एमएलए अमित भूषण और रामदेव राय चुने गए, लेकिन सांगठनिक प्रभाव की खोई गरिमा उसे नहीं मिल सकी। कांग्रेस के अभय कुमार सिंह सार्जन जैसे संगठन को सशक्त और प्रभावशाली बनाने में लगे रहे हैं। जातीय और संप्रदायों के वोट ध्रुवीकरण ने कांग्रेस के संगठन को नुकसान तो पहुंचाया, लेकिन जिले में कांग्रेस के कार्यकर्ता और कार्यक्रम को लेकर जागरूकता बनी रही।
कांग्रेस के कार्यालय की जमीन और मकान जिले में है
अभी भी स्वतंत्रता आंदोलन के समय में स्थापित कांग्रेस के कार्यालय की जमीन और मकान बेगूसराय, मंझौल, तेघड़ा, बलिया आदि में कांग्रेस भवन के नाम पर हैं। लेकिन रचनात्मक कार्यक्रम की कमी और गठजोड़ की राजनीति के कारण वे बियाबान पड़े हैं।
बेगूसराय में सात विधानसभा क्षेत्र हैं और कम से कम तीन विधानसभा क्षेत्र मटिहानी, बेगूसराय और बछवाड़ा में उसके पास सशक्त और प्रभावशाली नेता हैं। कन्हैया का गृह क्षेत्र तेघड़ा पर सीपीआई का कब्जा है। अब इस पदयात्रा के बाद जिले की कांग्रेस राजनीति पर क्या असर पड़ेगा यह तो आगे आने वाला समय बताएगा। लेकिन बेगूसराय में कांग्रेस के कन्हैया और राहुल गांधी कितना संगठन के लिए प्रभावी और कितने विधानसभा की सीटें झटक पाते हैं, लोगों की नजर इस पर रहेगी।