PatnaMuzaffarpur

बाल विवाह के खिलाफ मशाल लेकर अलख जगाने उतरीं इससे पीड़ित महिलाएं

पटना।मुजफ्फरपुर। पूरे देश में चल रही “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत 16 अक्टूबर को मनाए गए बाल विवाह मुक्त भारत दिवस के मौके पर गैर सरकारी संगठन इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट फाउंडेशन (आई डी एफ), मुजफ्फरपुर, बिहार ने 150 गाँव और 36 विद्यालयों में रैली एवं संगोष्ठी के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में 26825 लोगों ने जिसमेंकुछ् महिलाओं, बच्चों और आम लोगों ने शपथ ली कि वे न तो बाल विवाह का समर्थन करेंगे और न इसे बर्दाश्त करेंगे। बड़े पैमाने पर हुए इन कार्यक्रमों में मुखियागनों सहित अन्य गण्यमान लोगों ने हिस्सा लिया और इसे सफल बनाने में योगदान दिया।

Dss WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
bihar whatsapp Channel Join Now

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (एनएचएफएस-2019-21 ) के आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में 20 से 24 आयुवर्ग के बीच की 23.3 प्रतिशत युवतियों का विवाह 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया था।

 

 

 

 

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान देश के 300 से भी ज्यादा जिलों में चलाया जा रहा है। भारत से 2030 तक बाल विवाह के समग्र खात्मे के लक्ष्य के साथ पूरी तरह से महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से देश के 160 गैर सरकारी संगठन जुड़े हुए हैं। सोलह अक्टूबर को इस अभियान के एक साल पूरे हुए। इस अर्से में पूरे देश में हजारों बाल विवाह रुकवाए गए और लाखों लोगों ने अपने गांवों और बस्तियों में बाल विवाह का चलन खत्म करने की शपथ ली।

गांवों में पूरे दिन इस अभियान के समर्थन में उतरे लोगों की चहल पहल रही और इस दौरान रैली,ए संगोष्ठी एवं समूह चर्चा जैसे तमाम कार्यक्रमो का आयोजन किया गया।

 

 

 

 

सूरज ढलने के बाद हजारों लोगों ने हाथों में मशाल लेकर मार्च भी किया‌ और लोगों को जागरूक करते हुए संदेश दिया कि नए भारत में बाल विवाह की कोई जगह नहीं है। इस मार्च में स्कूली बच्चों, ग्रामीणों, धार्मिक नेताओं सहित समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। इस मार्च का मकसद गांवों और कस्बों में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करना‌ था। इस दौरान विवाह समारोहों में अपनी सेवाएं देने वालों जैसे कि शादियों में खाना बनाने वाले हलवाइयों, टेंट-कुर्सी लगाने वालों, फूल माला बेचने‌ व‌ सजावट करने‌ वालों, पंडित और मौलवी जैसे पुरोहित वर्ग को जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

 

 

बाल विवाह की पीड़ा से गुजरने के बाद अब इसके खात्मे के लिए अलख जगा रहीं. मुजफ्फरपुर जिला की श्रीमती मीरा देवी ने कहा की,” बाल विवाह मुक्त भारत अभियान मेरे लिए यह सुनिश्चित करने का ताकतवर माध्यम है कि मेरे समुदाय में बाल विवाह के अन्याय का शिकार होकर किसी बच्ची का भविष्य बर्बाद नहीं होने पाए। मेरी बेटी, मेरी नातिन या मेरे गांव की किसी भी लड़की का स्कूल जाना क्यों बंद होना चाहिए? क्यों कोई बच्ची कम उम्र में जब उसका शरीर इसके लिए विकसित नहीं हो पाया है, गर्भवती होकर अपने जीवन को खतरे में डाले? हमारे बच्चों को स्कूलों की जरूरत है, बच्चे पैदा करने की नहीं।“ .

इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट

 

 

 

(आई डी एफ) के जिला कार्यक्रम प्रभारी मोo शकील अनवर ने कहा की, “बाल विवाह वो अपराध है जिसने सदियों से हमारे समाज को जकड़ रखा है। लेकिन नागरिक समाज और बिहार सरकार द्वारा राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रति दिखाई गई प्रतिबद्धता और प्रयास जल्द ही एक ऐसे माहौल और तंत्र का मार्ग प्रशस्त करेंगे जहां बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित और निरापद वातावरण होगा। इन दोनों द्वारा साथ मिल कर उठाए गए कदमों और लागू किए गए कानूनों के साथ समाज व समुदाय की भागीदारी 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत सुनिश्चित करेंगी।”

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

error: Content is protected !!