Vaishali

समस्तीपुर मे लगातार पटाखा से शहर में वायु प्रदूषण 212 पर पहुंचा.

 

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समस्तीपुर। प्रदूषण का जहर धीरे धीरे शहर में पांव पसारने लगा है। दीपावली के बाद से ही शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को छठ के दौरान भारी में मात्रा में पटाखा छूटने से एयर क्वालिटी इंडेक्स 212 दर्ज किया गया, जो कि खराब स्थिति में है। समाहरणालय परिसर में एंबियंट एयर क्वालिटी मशीन में इसे दर्ज किया गया है। वायु मंडल में फैले हुए प्रदूषण का मापन होने के बाद इसे डिस्पले किया जाता है। हालांकि शाम में आसमान साफ होने की वजह से प्रदूषण कम हुआ और एक्यूआई 150 के नीचे पहुंच गया। हालांकि छठ के पहले भी हवा की गुणवत्ता शहर में बहुत अच्छी नहीं थी।

जमकर हुई आतिशबाजी ने हवा को और खराब कर दिया है। डॉ. सौरभ कुमार कहते है कि पटाखों के धुएं से अस्थमा और एलर्जी पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। पटाखों के धुएं से फेफड़ों में सूजन आ सकती है। जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और हालात यहां तक भी पहुंच सकते हैं कि ऑर्गेन फेलियर्स और मौत तक हो सकती है, इसलिए धुएं से बचने की कोशिश करना चाहिए। पटाखों के धुएं की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को सांस की समस्याएं हो, उन्हें अपने आप को प्रदूषित हवा से बचा कर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पटाखे के धुएं अथवा आतिशबाजी के कारण हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कणों पर कॉपर, जिक, सोडियम, लैड, मैग्निशियम, कैडमियम, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जमा हो जाते हैं। इन गैसों के हानिकारक प्रभाव होते हैं। इसमें कॉपर से सांस की समस्याएं, कैडमियम-खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम करता है। जिनकी की वजह से उल्टी व बुखार व लेड से तंत्रिका प्रणाली को नुकसान पहुंचता है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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