समस्तीपुर:एसपी और डीएसपी के गोद लिए थानों में महीनों बाद भी कांड और अपराध नियंत्रण चुनौती
समस्तीपुर,पुलिस थानों की कार्यप्रणाली में सुधार, अपराध नियंत्रण और लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से शुरू की गई ‘थाना गोद लेने’ की व्यवस्था पांच महीने बाद भी सवालों के घेरे में है। जिले में एसपी से लेकर डीएसपी रैंक के अधिकारियों को अलग-अलग थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि आम लोगों को बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था मिल सके और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के साथ कांडों का ससमय निष्पादन हो सके। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ मॉडल के तहत इस व्यवस्था की शुरुआत की थी। इसके तहत संबंधित वरीय अधिकारियों को अगले एक वर्ष तक अपने जिम्मे के थानों की नियमित निगरानी, लंबित मामलों की समीक्षा और पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी दी गई थी। योजना के तहत सबसे अधिक लंबित कांडों वाले विभूतिपुर थाना की जिम्मेदारी खुद एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने ली थी।
उस समय यहां करीब 500 मामले लंबित बताए गए थे। इसके अलावा डीएसपी मुख्यालय को नगर थाना, एसडीपीओ सदर-1 को मुफ्फसिल थाना, एसडीपीओ सदर-2 को कल्याणपुर थाना और एसडीपीओ रोसड़ा को रोसड़ा थाना की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अन्य वरीय अधिकारियों को भी अलग-अलग थानों की निगरानी का जिम्मा दिया गया था। इस व्यवस्था के तहत अधिकारियों को हर महीने संबंधित थानों का निरीक्षण कर प्रगति रिपोर्ट भेजनी थी। लंबित कांडों में आरोप पत्र दाखिल करने, वारंट का निष्पादन करने और पुराने मामलों के निपटारे को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही डिजिटल डायरी, सीसीटीएनएस और डेटा आधारित पुलिसिंग के माध्यम से थानों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया था। व्यवस्था लागू करते समय उम्मीद जताई गई थी कि वरीय अधिकारियों की सीधी निगरानी से पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ेगी और अनुसंधान से लेकर कांडों के निष्पादन तक में तेजी आएगी। हालांकि, पांच महीने बीतने के बाद भी निगरानी और ठोस कार्रवाई के स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने जिस विभूतिपुर थाने को गोद लिया था वहां अपराध नियंत्रण व कांड निष्पादन अब भी चुनौती बनी हुई है। यहां कई पुराने कांडों का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है। 16 जुलाई को सिंघियाघाट पंचवटी चौक स्थित दिनेश ज्वेलर्स एंड सन्स में हथियारबंद बदमाशों ने लूट की कोशिश की थी और विरोध करने पर बदमाशों ने दुकान संचालक दिनेश साह को गोली मार दी थी। इस घटना के तीन महीने से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस बदमाशों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। वहीं, विभूतिपुर थाना क्षेत्र के महमदपुर सकड़ा गांव में 30 जून 2024 को डेयरी परिसर स्थित सीएसपी में लूट के बाद एक महिला ग्राहक व कर्मी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना में शामिल बदमाशों की पहचान बताने या सुराग देने वाले को पुलिस ने 25 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा की थी। हालांकि, सवा दो वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो संलिप्त बदमाशों को गिरफ्तार कर सकी है और न ही मामले का खुलासा कर सकी है। इसके अलावा, विभूतिपुर थाना क्षेत्र के भरपुरा में 24 अगस्त की रात घर में घुसकर अज्ञात अपराधियों ने वृद्ध दंपति बंगाली दास (70 वर्ष) और उनकी पत्नी धनमा देवी (65 वर्ष) की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। इस मामले का भी पुलिस आज तक खुलासा नहीं कर सकी है।
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