Patna

बिहार के इस मंदिर में चढ़ाई जाती है रुपयों की माला, दर्शन के लिए जुटते हैं भक्त

Patna.मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के चिरैया प्रखंड अंतर्गत गोढिया गांव स्थित मनोकामना माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. जिला मुख्यालय मोतिहारी से करीब 20 किलोमीटर और चिरैया व पकड़ीदयाल से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित यह चार मंजिला मंदिर अपनी वास्तुकला और इससे जुड़ी मान्यताओं के लिए जाना जाता है. यहां बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं.

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बेटी से जुड़ी मान्यता के बाद हुई मंदिर की स्थापना

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी. इसकी कहानी गोढिया गांव निवासी जयमंगल साह की पुत्री अनिता कुमारी से जुड़ी है. बताया जाता है कि वर्ष 1983 से पहले एक दिन खेलते समय 10 वर्षीय अनिता पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूब गयी थी. ग्रामीणों ने उसे बाहर निकाला, तो उसकी सांसें थम चुकी थीं और लोगों ने उसे मृत मान लिया था.

 

मान्यता के अनुसार, बेटी की हालत देखकर पिता जयमंगल साह ने माता से प्रार्थना की कि यदि उनकी पुत्री जीवित हो गयी, तो वह उस स्थान पर भव्य मंदिर बनवायेंगे. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ देर बाद बच्ची में जीवन के लक्षण दिखाई देने लगे और वह स्वस्थ हो गयी. इसी घटना और पिता की मन्नत को मंदिर की स्थापना से जोड़कर देखा जाता है.

 

नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मनोकामना माता मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान सप्तमी से दशमी तक विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. यहां बिहार के अलग-अलग जिलों के साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी भक्त पहुंचते हैं.

 

मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु माता को रुपयों की माला चढ़ाते हैं. मंदिर में इस तरह की मालाएं चढ़ावे के रूप में देखने को मिलती हैं. स्थानीय स्तर पर यहां हर साल करोड़ों रुपये के चढ़ावे की बात कही जाती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.

 

सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं मंदिर

मनोकामना माता मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है. मोतिहारी जिला मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर है, जबकि चिरैया और पकड़ीदयाल से मंदिर लगभग सात किलोमीटर दूर है.नवरात्र के अलावा सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. ग्रामीण परिवेश में स्थित यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.

Anaya

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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