Patna

अवैध रूप से संचालित दो निजी नर्सिंग होम पर सीएस ने लगाया 10 हजार रुपए का जुर्माना

मधुबनी।अवैध व मानक अनुरूप संचालित नहीं होने वाले नर्सिंग होम, पैथ लैब, अल्ट्रासाऊंड व एक्स – रे क्लीनिक पर विभाग सख्त है. इस क्रम में मधेपुर प्रखंड के न्यू बस स्टैंड रोड स्थित बिना निबंधन व मानक स्तर से संचालित नहीं हो रहे दिव्या इमरजेंसी हास्पिटल व सोनपुर रोड मधेपुर स्थित बिना मानक अनुरूप संचालित कोशी स्वास्थ्य सेवा सदन के संचालक पर सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने प्रथम उल्लंघन का दोषी मानते हुए 10 – 10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है. सिविल सर्जन ने संचालक को क्लिनिक को बंद कर पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण देते हुए अर्थ दंड की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया है. आदेश का उलंघन करने एवं क्लिनिक खुला पाए जाने पर संचालक के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

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मानक अनुरूप संचालित नहीं पाया गया नर्सिंग होम :

विदित हो कि सीएस डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि दोनों निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया था. टीम में जिला वैक्टर बोर्न डिजिज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ डीएस सिंह व प्रभारी उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर शामिल थे. जांच दल द्वारा सिविल सर्जन को सौपे प्रतिवेदन में बिना निबंधन व मानक स्तर से संस्थानों का संचालन नहीं होने की पुष्टि की गई. प्रतिवेदन के आलोक में सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने दोनों संचालकों अर्थदंड लगाया है. सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया कि जिला में मानक अनुरूप संचालित नहीं होने बाले अब तक 200 से अधिक संचालकों पर अर्थ दंड लगाया गया है. इससे विभाग को लगभग 1 करोड रुपये से अधिक के राजस्व की प्राप्ति हुई है. जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद सभी प्रकार के क्लिनिक, नर्सिंग होम, अस्पताल, लैबोरेट्री का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.

 

 

 

इसके लिए जिला स्तर पर जिला प्राधिकार के गठन की अधिसूचना जारी की गई है. अगर कोई क्लिनिक अस्पताल या नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन एवं मानक स्तर से संचालित नहीं किया जाता है, तो पहली बार उल्लंघन करने पर 10 हजार, दूसरी बार उल्लंघन करने पर 25 हजार और उसके बाद निबंधन नहीं कराने पर संस्थान को सील कर दिया जाएगा. राज्य सरकार द्वारा क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम 2010 पारित कर लिया गया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार बिहार नैदानिक स्थापना रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन नियमावली 2013 को अधिसूचित कर दिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग नैदानिक स्थापना राज्य परिषद और जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार का गठन किया है. इस रेगुलेशन के प्रभावी होने के बाद अब राज्य के सभी प्रकार के इलाज करने वाले संस्थान का निबंधन का रास्ता साफ हो गया है.

अधिनियम में किया गया है प्रावधान :

अधिनियम में प्रावधान किया गया है, कि राज्य में स्थापित अस्पताल की स्थापना किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के निकाय द्वारा की गई हो. ऐसे अस्पताल, प्रसुति गृह, नर्सिंग होम, औषधालय क्लीनिक, आरोग्य सदन या कोई संस्थान चाहे जिस किसी नाम से जाना जाता है. अगर वहां पर चिकित्सा की किसी भी मान्यता प्राप्त पद्धति से किसी भी बीमारी, चोट, विकलांगता या गर्भस्थ के लिए इलाज अथवा देखभाल की सेवाएं दी जाती हो.

 

 

इसके अलावा बीमारियों के इलाज को लेकर स्थापित प्रयोगशाला और चिकित्सकीय उपकरण की सहायता से रोगात्मक जीवाणु विषयक, अनुवांशिक विकिरण चिकित्सा (रेडियोलॉजिकल), रासायनिक जैविक चिकित्सा या जांच पड़ताल की सेवाएं दी जाती हो, उनका निबंधन होगा. साथ ही इस अधिनियम के तहत एकल चिकित्सक सिंगल रूम क्लिनिक भी शामिल है. इन सभी का निबंध करना आवश्यक हो जाएगा. सिविल सर्जन ने कहा कि बिना निबंधन तथा मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने बाले मुख्यालय सहित प्रखंड स्तर पर अवैध निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर करवाई जारी रहेगा.

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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