समस्तीपुर:राम-सीता सहित चारों युगल के विवाह प्रसंग सुन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु
समस्तीपुर।शाहपुर पटोरी.स्थानीय शिउरा भूईयाँ स्थान में आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस सोमवार को अयोध्या धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक दिव्यांशु जी महाराज ने भगवान श्रीराम एवं माता सीता सहित चारों युगल दंपत्तियों के दिव्य विवाह और विदाई प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु विवाह उत्सव की आनंदमयी छटा और जनकपुरी की विदाई के करुण दृश्य को सुन भावविभोर हो उठे। कथावाचक ने कहा कि मिथिला में भगवान श्रीराम और माता सीता के साथ भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला तथा शत्रुघ्न-श्रुतिकीर्त ि का विवाह वैदिक रीति-रिवाजों एवं मंगल गीतों के बीच संपन्न हुआ।
विवाह के दौरान महिलाओं द्वारा भगवान को प्रेमपूर्वक गारी सुनाने की परंपरा का भी सुंदर वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो उठे। कथा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष और भक्ति रस से गूंजता रहा। उन्होंने कहा कि विवाह उपरांत जब चारों बेटियों की विदाई का समय आया तो पूरा जनकपुर शोकमग्न हो गया। विशेष रूप से राजा जनक और माता सीता के प्रेम का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि जैसे जल से अलग होने पर मछली तड़प उठती है, उसी प्रकार पुत्री की विदाई के समय राजा जनक का हृदय व्याकुल हो उठा। उन्होंने कहा कि बेटी की विदाई का दर्द वही पिता समझ सकता है, जिसने अपनी पुत्री को स्नेहपूर्वक पाल-पोसकर विदा किया हो। कथा के इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। दिव्यांशु जी महाराज ने माता सुनयना द्वारा चारों पुत्रियों को दिए गए संस्कारों का भी भावपूर्ण चित्रण किया।
उन्होंने बताया कि माता ने अपनी बेटियों को ससुराल में सभी का सम्मान करने, सास-ससुर को माता-पिता समान मानने तथा पति के अनुरूप मर्यादित और आदर्श जीवन जीने की सीख दी। कथावाचक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बेटी की विदाई केवल एक रस्म नहीं, बल्कि संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों का अद्भुत संगम है। कथा के दौरान आगे बताया गया कि विवाह उपरांत जब भगवान श्रीराम सहित चारों युगल अयोध्या पहुंचे तो पूरी नगरी उत्सवमय हो उठी। अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया था। नगर में चारों ओर मंगल गीत, शहनाई और उत्सव का वातावरण व्याप्त था।
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