Patna

भारत से 100 रुपए से अधिक का सामान नेपाल ले जाने पर नहीं लगेगा कस्टम

रक्सौल.नेपाल सर्वोच्च अदालत ने भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रपए से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए भंसार (कस्टम) शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने अंतिम फैसला आने तक सरकार को ऐसे सामानों पर शुल्क नहीं वसूलने का निर्देश दिया है।इस आदेश से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा की खरीदारी करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।

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शुक्रवार को न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल और टेकप्रसाद ढुंगाना की संयुक्त इजलास ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय, अर्थ मंत्रालय समेत संबंधित सरकारी निकायों को यह अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिट याचिका के अंतिम निपटारे तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भंसार शुल्क नहीं लिया जाए।

 

14 अप्रैल 2026 को किया था लागू

 

 

दरअसल, नेपाल सरकार ने नेपाल राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के जरिए भारत-नेपाल सीमा से लाए जाने वाले 100 रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य भंसार कर लगाने का प्रावधान किया था। यह व्यवस्था नेपाल के नए वर्ष, 14 अप्रैल 2026 से लागू की गई थी।इसके बाद वीरगंज, भैरहवा और बीराटनगर सहित तराई-मधेश के कई सीमा नाकों पर जांच और कर वसूली में सख्ती बढ़ा दी गई थी।

 

व्यापारियों और नागरिकों ने जताया था विरोध

 

इस निर्णय का सबसे अधिक असर रक्सौल-वीरगंज जैसे सीमावर्ती इलाकों में देखने को मिला, जहां दोनों देशों के बाजारों पर लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें निर्भर करती हैं। दवा, किराना, कपड़ा और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के दौरान लोगों को बार-बार जांच और कर वसूली का सामना करना पड़ रहा था।स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने इसे सीमा क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक वास्तविकताओं के विपरीत बताते हुए विरोध भी जताया था।

 

सरकार के इसी निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पण्डित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और प्रशान्त विक्रम शाह ने अप्रैल 2026 में सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी।याचिका में कहा गया था कि 100 रुपए से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर कर लगाना भंसार महसुल ऐन 2081 की धारा 13(2) की भावना के विपरीत है और इससे सीमावर्ती नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

 

सरकार की व्यवस्था पर रोक लगाने का आदेश

 

अधिवक्ता आकाश महतो ने कहा कि संबंधित कानून में भंसार छुट की व्यवस्था का उल्लेख है, जबकि सरकार की अधिसूचना में छोटे मूल्य के सामान पर भी कर लगाने का प्रावधान कर दिया गया था। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान इसी आधार पर सरकार की व्यवस्था पर रोक लगाने का आदेश दिया।

 

इधर, नेपाल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं वरीय पत्रकार आनन्द कुमार गुप्ता ने अदालत के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र का जीवन, व्यापार और सामाजिक ढांचा एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस तरह की सख्त कर व्यवस्था से आम नागरिक और छोटे व्यापारी प्रभावित हो रहे थे।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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