समस्तीपुर:ढट्ठा गांव में होली के अवसर पर रावण का पुतला दहन, जुटी भीड़
समस्तीपुर।रोसड़ा |प्रखंड अंतर्गत ढट्ठा गांव में बुधवार की शाम होली के अवसर पर परंपरागत तरीके से रावण का पुतला दहन किया गया। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में ग्रामीण, बच्चे, महिलाएं और युवक-युवतियां कार्यक्रम को देखने के लिए तालाब किनारे एकत्रित हुए। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ढट्ठा गांव में होली के अवसर पर रावण दहन की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। इस परंपरा के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। इस वर्ष करीब 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया गया था, जिसे आकर्षक ढंग से सजाया गया था। शाम होते ही विधि-विधान के साथ पुतले का दहन किया गया।कार्यक्रम के दौरान लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और रंगों के साथ खुशियां मनाईं। तालाब किनारे ढोल-नगाड़ों और होली गीतों के बीच माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना रहा। रावण दहन के समय आतिशबाजी भी की गई, जिससे पूरा वातावरण रोशनी और उत्साह से भर उठा।रावण के पुतले में आग लगते ही लोग जयकारे लगाने लगे और बुराई के अंत का संदेश दिया गया। इस दौरान बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में गांव के युवाओं और स्थानीय लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
शाहपुर पटोरी “बांधल-बांधल ले हो, आरे पहिले बंधानिया लोकदेव के… जैसे पारंपरिक होली गीतों की गूंज के साथ बुधवार को पटोरी प्रखंड के ऐतिहासिक गांव धमौन में विख्यात छाता होली का भव्य आयोजन हुआ। हजारों की संख्या में ग्रामीण चार दर्जन से अधिक रंग-बिरंगे कलात्मक छातों के साथ होली गीत गाते हुए बाबा निरंजन स्वामी मंदिर पहुंचे और पूरे परिसर को रंग, उमंग और लोकसंस्कृति से सराबोर कर दिया। दोपहर से ही स्वामी निरंजन मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे बांस से निर्मित अद्भुत कलाकृतियों से सजे खूबसूरत छातों के साथ विभिन्न टोल-मोहल्लों की टोलियां मंदिर परिसर पहुंचने लगीं। ढोलक, झाल, करताल और मंजीरे की मधुर धुन पर लोग नाचते-गाते मंदिर पहुंचे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवी हो उठा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी टोलियों ने सबसे पहले अपने इष्ट देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद सामूहिक रूप से अबीर-गुलाल उड़ाकर पारंपरिक होली का आनंद लिया। इस दौरान अलग-अलग टोलियों द्वारा एक से बढ़कर एक लोकगीत और होली के पारंपरिक धमार गाए गए, जिसे सुनने और देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
ग्रामीणों ने बताया कि धमौन की यह छाता होली लगभग नौ दशकों से भी अधिक पुरानी परंपरा है। विशाल धमौन के पांचों पंचायतों के लोग हर वर्ष अपने-अपने टोलों से छाता बनाकर इस उत्सव में शामिल होते हैं। सभी लोग अपने इष्ट देवता को अबीर-गुलाल अर्पित करते हैं और जाति-पात व भेदभाव से ऊपर उठकर सामूहिक रूप से होली का पर्व मनाते हैं। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए क्षेत्र के अलावा आसपास के कई जिलों से भी लोग पहुंचे। देर रात तक मंदिर परिसर में होली गीतों की गूंज बनी रही। रात्रि लगभग 12 बजे के बाद सभी टोलियां चैता गाते हुए अपने-अपने घरों की ओर लौट गईं। धमौन की छाता होली एक बार फिर यह साबित कर गई कि लोक परंपराएं केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक धरोहर भी हैं।
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