Samastipur

बूढ़ी गंडक में बढ़ती गाद से घट रहा जलस्तर जगह-जगह टापू बना 

समस्तीपुर.जिले से होकर गुजरने वाली बूढ़ी गंडक नदी इन दिनों गाद जमाव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। लगातार गाद जमा होने के कारण नदी का जलस्तर कम होता जा रहा है और कई जगहों पर जलधारा सिकुड़ती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से नदी की उड़ाही नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यदि समय रहते कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले दिनों में जलसंकट गहरा सकता है।

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बूढ़ी गंडक में वर्षों से जमा हो रही गाद अब कई स्थानों पर टीलानुमा रूप ले चुकी है। इन टीलों पर घास और झाड़ियां उग आई हैं, जिससे नदी के बीच छोटे-छोटे टापू बन गए हैं। इससे नदी की मुख्य धारा संकरी हो गई है और जलप्रवाह भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां नदी का पानी पूरे विस्तार में बहता था, वहीं अब कई जगहों पर पानी की चौड़ाई काफी कम हो गई है। गाद के कारण नदी की गहराई कम हो रही है, जिससे पानी का प्रवाह भी बाधित हो रहा है। बरसात के समय पानी का दबाव बढ़ने पर यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी की नियमित सफाई और गाद निकासी नहीं हुई तो भविष्य में बाढ़ और जलजमाव की समस्या भी बढ़ सकती है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि बूढ़ी गंडक नदी की सफाई और गाद निकासी को लेकर अब तक कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया जाता है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस पहल नहीं दिखती।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि नदी की उड़ाही कर गाद को हटाया जाए, ताकि नदी की जलधारा सामान्य हो सके और भविष्य में जलसंकट की स्थिति से बचा जा सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

 

^बिरौली के रामचंदरी घाट पर एन‌एच‌आइ को गाद उड़ाही के लिए एन‌ओसी दी गई थी। लेकिन ग्रामीणों के विरोध से ऐसा नहीं हो पाया है। वार्ता के बाद भी स्थानीय लोग नहीं मान रहे हैं। जबकि गाद उड़ाही की अभी कोई योजना नहीं प्राप्त हुई है। – राकेश रंजन, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, समस्तीपुर

 

नदी के जलस्तर में गिरावट का असर पशुपालकों और किसानों पर भी पड़ रहा है। मवेशियों को पानी पिलाने के लिए ग्रामीणों को अब ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। इससे खेती पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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