Patna

14 अप्रैल के बाद बिहार में भाजपा सरकार:यात्रा पूरी करने के बाद नीतीश देंगे इस्तीफा

पटना।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बन गए हैं। उनके राज्यसभा जाने के साथ ही सत्ता के गलियारों में चर्चा तेज है कि कब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे? कब दिल्ली शिफ्ट होंगे?

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सूत्रों के मुताबिक, 10 अप्रैल से पहले नीतीश के सीएम की कुर्सी छोड़ने की संभावना कम है। 9 अप्रैल के बाद वह राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इससे पहले उन्हें विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। खरमास बाद भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बन सकती है। खरमास 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है।

30 मार्च तक पूरी कर सकते हैं समृद्ध यात्रा, फिर देंगे इस्तीफा

 

16 मार्च को नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव जीता। उधर, कैबिनेट सचिवालय ने समृद्धि यात्रा के चौथे चरण का शेड्यूल जारी कर दिया। वह 20 मार्च तक बिहार के 8 जिलों (भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, मुंगेर, लखीसराय, गयाजी और औरंगाबाद) की यात्रा करेंगे।

 

उनकी यात्रा अभी तक नालंदा, पटना, भोजपुर, रोहतास, जहानाबाद, अरवल, कैमूर और बक्सर में नहीं पहुंची है। नीतीश यात्रा के 5वें चरण में इन जिलों में जा सकते हैं। जो 30 मार्च तक हो सकती है।

बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा पूरी करने के बाद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इसका मतलब हुआ कि वह 30 मार्च से पहले मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ने वाले हैं।

वैसे राज्यसभा में उनकी सदस्यता 9 अप्रैल के बाद शुरू होगी। इसका मतलब हुआ कि वह उसके बाद ही राज्यसभा सांसदी की शपथ लेंगे।

JDU के एक सीनियर नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, ‘नीतीश कुमार जब मन करेगा तब इस्तीफा देंगे। वह दबाव की राजनीति नहीं करते। किसी तरह के प्रलोभन और प्रेशर में नहीं आते। वह जब तक चाहें, सीएम बनें रहेंगे।’

 

14 अप्रैल के बाद बन सकती है नई सरकार

 

अभी खरमास चल रहा है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते। यह 14 अप्रैल को खत्म होने वाला है। इसके बाद नई सरकार बनाने की कवायद शुरू हो सकती है।

 

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद संभावना है कि भाजपा का अगला सीएम होगा। हालांकि, अब तक ऑफिशियल ऐलान किसी पार्टी ने नहीं किया है कि मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा.अगर भाजपा नेता मुख्यमंत्री बनते हैं तो कैबिनेट में भाजपा-जदयू की हिस्सेदारी उलट जाएगी। सूत्रों के अनुसार इस वक्त जदयू के पास जो विभाग हैं वे बीजेपी के पास जा सकते हैं और बीजेपी के विभाग जदयू के पास।

उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के कद में बदलाव आएगा। भाजपा और जदयू के कोटे के मंत्रियों की संख्या भी बदल सकती हैभाजपा कोटे से मंत्री के पद की संख्या 13 तक सीमित हो सकती है। वहीं, जदयू से यह संख्या 15 हो सकती है।

विधानसभा स्पीकर भी बदल सकते हैं

 

सीएम पद भाजपा को मिलने पर जदयू के खाते में विधानसभा स्पीकर पद आ सकता है। अभी भाजपा के प्रेम कुमार स्पीकर हैं। इनसे पहले भाजपा के विजय सिन्हा और नंदकिशोर यादव इस पद पर थे।पहले जदयू नेता विजय चौधरी 24 नवंबर 2015 से 23 नवंबर 2020 तक और उदय नारायण चौधरी 2005-2015 तक स्पीकर रह चुके हैं।

 

जदयू की कोशिश निशांत को मिले सरकार में बड़ी भूमिका

 

जदयू की कोशिश है कि नीतीश के दिल्ली जाने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार को सरकार में बड़ी भूमिका मिले। इधर,अंदर खाने खबर है कि जदयू सीएम कुर्सी छोड़ने की जल्दी में नहीं है।तैयारी निशांत को बड़े जिम्मेदारी दिलाने की है। जदयू की मांग है कि उन्हें सीएम या डिप्टी सीएम की कुर्सी मिले। निशांत पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद से एक्टिव मोड में हैं।

 

32 मंत्रियों के साथ फुल फ्लैज्ड सरकार का हो सकता है गठन

 

20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार ने 26 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। अब नई सरकार फुल फ्लैज्ड 32 मंत्री के साथ गठित हो सकती है।

 

इनमें 13 मंत्री BJP के, 15 JDU के 2 LJP(R) के साथ RLM-HAM के एक-एक मंत्री हो सकते हैं। BJP और JDU दोनों पार्टियों से सरकार में नए चेहरों को मौका मिल सकता है।

 

नई सरकार में JDU से इन पूर्व मंत्रियों को मिल सकता है मौका

 

1. महेश्वर हजारी: नीतीश सरकार में अब तक मंत्री नहीं बनने वाले महेश्वर हजारी को कैबिनेट एक्सटेंशन में मौका मिल सकता है। पिछली सरकार में IPRD मंत्री थे। मौजूदा कैबिनेट में यह विभाग विजय चौधरी के पास है। हजारी समस्तीपुर के कल्याणपुर से विधायक हैं।

 

2. रत्नेश सदा: रत्नेश सदा सहरसा के सोनवर्षा विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार विधायक बने हैं। इन्होंने 13454 वोटों के अंतर से जीत पाई है। 2023 में जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने इस्तीफा दिया तो महादलित समुदाय से आने वाले रत्नेश सदा को उत्पाद, मद्य निषेध एवं निबंधन मंत्री बनाया गया था।

 

3. जयंत राज: भवन निर्माण मंत्री रह चुके जयंत राज को फिर से बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। अभी भवन निर्माण विभाग का अतिरिक्त प्रभार विजय कुमार चौधरी के पास है। जयंत राज बांका के अमरपुर विधानसभा सीट से विधायक बने हैं। उन्होंने 33 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की। 2020 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्हें नीतीश ने मंत्रिमंडल में जगह दी थी।

 

4. शीला कुमारी: पहले परिवहन मंत्री रहीं हैं। इस समय परिवहन मंत्री का अतिरिक्त प्रभार श्रवण कुमार के पास है। शीला मधुबनी जिले के फुलपरास विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 14099 वोटों के अंतर से चुनाव जीता। 55 साल की शीला कुमारी ने पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़ाई की है।

 

20 नवंबर 2025 को जदयू के इन नेताओं ने ली थी मंत्री पद की शपथ

 

अब जानिए जदयू के नए चेहरे, जो बन सकते हैं मंत्री

 

1. उमेश कुशवाहा: जदयू के प्रदेश अध्यक्ष हैं। कुशवाहा समाज से आते हैं। नीतीश कैबिनेट में इनके मंत्री बनने की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जाती है। वैशाली जिले के महनार विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं।

 

2. नचिकेता मंडल: मुंगेर के जमालपुर विधानसभा सीट से विधायक बने नचिकेता मंडल मंत्री बन सकते हैं। नीतीश कुमार के राइट हैंड ललन सिंह के करीबी माने जाते हैं। नाचिकेता ने 36228 वोटों के अंतर से विधानसभा चुनाव जीता है।

 

3. शालिनी मिश्रा: मोतिहारी के केसरिया विधानसभा सीट से विधायक बनीं शालिनी मिश्रा भूमिहार समाज से आती हैं। लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गईं हैं। उनके पिता स्वर्गीय कमला मिश्र मधुकर मोतिहारी से CPI के टिकट पर 4 बार सांसद बने थे।

 

अब जानिए भाजपा के कौन से नए नेता मंत्री बन सकते हैं

 

यदि स्थिति बदलती है तो भाजपा कोटे से मंत्री पद की रेस में भाजपा के ये 5 नेता हैं जो अगली सरकार में मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।नितिन नवीन कायस्थ समाज से हैं। उनकी मंत्री वाली कुर्सी फिलहाल दिलीप जायसवाल को मिली है। वह अतिरिक्त प्रभार मंत्री बनाए गए हैं। नए कैबिनेट के दौरान यह पद भाजपा के किसी नेता को मिलेगा।

 

मंत्री किसे बनाया जाए, इसको लेकर पार्टी सोशल इंजीनियरिंग का भी ध्यान रखेंगी। भाजपा कोटे से राजपूत, भूमिहार, मैथिल ब्राह्मण जाति से मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।20 नवंबर 2025 को भाजपा के इन नेताओं ने ली थी मंत्री पद की शपथ

 

 

भाजपा के ये नेता बन सकते हैं मंत्री…

 

1. नीतीश मिश्रा: झंझारपुर से 5वीं बार विधायक बने हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी की ओर से तीसरी सबसे बड़ी जीत (मार्जिन 55 हजार) हासिल की है। 2020 का चुनाव 42 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीता था।

 

उद्योग, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास मंत्री का अनुभव है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड व यूके से पढ़ाई की है। इनके पास MBA की डिग्री है। मैथिल ब्राह्मण कोटे से मंत्री बनाए जा सकते हैं।

 

2. संजीव चौरसिया: पटना शहर के दीघा सीट से विधायक संजीव चौरसिया मंत्री बन सकते हैं। उन्हें इस पद का लंबा इंतजार रहा है। चौरसिया ने सीपीआई (एमएल) की उम्मीदवार दिव्या गौतम को 59,079 वोटों के अंतर से हराया है। दिव्या दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की बहन हैं। संजीव चौरसिया के पिता गंगा प्रसाद भाजपा के सीनियर नेता हैं। सिक्किम के राज्यपाल रहे हैं।

 

3. संजय मयूख: विधान परिषद के सदस्य संजय मयूख कायस्थ जाति से आते हैं। नितिन नवीन की जगह उन्हें मंत्री पद मिलने की उम्मीद है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीबी हैं। जमीनी स्तर के नेता माने जाते हैं। इनकी पकड़ प्रदेश नेतृत्व पर भी है।

 

4. रजनीश कुमार: बेगूसराय की तेघड़ा सीट से 35,364 वोटों के अंतर से जीतकर विधायक बने हैं। उन्हें 1,12,770 वोट मिले। यह तेघड़ा में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और वामपंथी किले के ढहने का सबूत था।

 

रजनीश चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे हैं। महागठबंधन के कड़े मुकाबले के बीच जीत हासिल की। 2009 से 2021 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। छात्र जीवन से ही RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े हैं।

 

5. नीरज कुमार बबलू: राजपूत जाति से आने वाले नीरज कुमार बबलू 2005 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। उन्होंने JDU से राजनीतिक करियर शुरू किया था। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में छातापुर सीट से 16,178 मतों के अंतर से जीत पाई है। उन्हें 1,22,491 वोट मिले।

 

क्या राज्यसभा का सांसद रह सकता है CM?

 

मौजूदा वक्त में नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री बनने के लिए छह माह के अंदर किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य बनना होता है।

 

नीतीश का मौजूदा कार्यकाल 7 मई 2024 को शुरू हुआ। यह 6 मई 2030 तक चलने वाला है। नीतीश पिछले दो दशकों से विधानसभा चुनाव लड़े बिना सीएम बनते रहें हैं। राज्यसभा सांसद रहने के दौरान सीएम नहीं रह सकते, ऐसा नियम नहीं है।

 

नोट- एडी सिंह को पहली वरीयता के 37 वोट और शिवेश को 30 वोट मिले थे। दूसरे वरीयता में शिवेश राम के पास टोटल वैल्यू ऑफ वोट बढ़ गए। एडी सिंह को दूसरी वरीयता का एक भी वोट नहीं मिला।

अब 3 नियम से समझिए नीतीश कैसे 8 माह तक CM रह सकते

 

संविधान के आर्टिकल-99 के मुताबिक, राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद सांसदों को शपथ लेना जरूरी है। अगर कोई सांसद 60 दिन तक संसद में उपस्थिति दर्ज नहीं करता है तो उसकी सीट को खाली मान लिया जाएगा। मतलब शपथ लेने के लिए चुनाव जीतने के बाद 60 दिन का वक्त मिलता है। इस तरह नीतीश चाहें तो 9 जून तक राज्यसभा सदस्य पद की शपथ ले सकते हैं।

अभी नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं। सांसद का शपथ लेने के पहले उनको MLC पद से इस्तीफा देना होगा। चूंकि कोई भी व्यक्ति एक समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है।

संविधान के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन (विधानसभा/विधान परिषद) का सदस्य रहे मुख्यमंत्री बन सकता है। उसे मुख्यमंत्री बनने के 6 महीने के अंदर दोनों सदनों विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक का सदस्य बनना जरूरी है।

ऊपर के तीनों नियमों के मुताबिक, नीतीश कुमार अगर 8 जून को MLC पद छोड़ते हैं और राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेते हैं तो वह तब तक बतौर MLC मुख्यमंत्री रह सकते हैं। अगर 8 जून को MLC पद छोड़ेंगे तो अगले 6 महीने (मतलब 8 दिसंबर) तक राज्यसभा सांसद रहते भी मुख्यमंत्री रह सकते हैं।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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