296 करोड़ में पटना में चलेगा अल्ट्रा पॉड्स, चारों सचिवालयों में आसानी से चंद सेकेंड में पहुंचेंगे
पटना.सरकारी अधिकारियों की आसान कनेक्टिविटी के लिए विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधान सभा होते हुए पुराने सचिवालय तक अल्ट्रा पॉड्स चलाए जाएंगे। यह पर्सनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम निर्धारित सरकारी भवनों के बीच नॉन-स्टॉप यात्रा के रूप में काम करेगा। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने लार्सन एंड टर्बो (एल एंड टी) की टीम के साथ बैठक की। बैठक में एल एंड टी ने पटना में अल्ट्रा पॉड्स संचालन की रूपरेखा पेश की। बिहार सरकार की यह पहल भारत सरकार के स्मार्ट, सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मोबिलिटी के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
अल्ट्रा पॉड्स परियोजना के ट्रैक की लंबाई 5 किलोमीटर होगी, कुल 59 पॉड्स चलेंगे
7 सेकंड के अंतराल पर पॉड मिलेगा, एक में 6 यात्री बैठेंगे
यात्रियों की सुविधा के लिए मात्र 7 सेकंड के अंतराल पर अगला पॉड स्टेशन पर उपलब्ध होगा। एक पॉड में 6 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। सभी अल्ट्रा पॉड्स पूरी तरह स्वचालित होंगे। इनमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। सुरक्षा के लिए हर पॉड में कैमरे लगे होंगे। इसका किराया बेहद मामूली रखा जाएगा ताकि यह सभी के लिए सुलभ रहे। यात्री टोकन या कार्ड रिचार्ज कर सेवा का उपयोग कर सकेंगे।
5 किमी ट्रैक, 59 पॉड्स का संचालन
अल्ट्रा पॉड्स परियोजना के ट्रैक की कुल लंबाई 5 किलोमीटर होगी। इस ट्रैक पर 59 पॉड्स का संचालन किया जाएगा। परियोजना का निर्माण 296 करोड़ रुपये से होगा। यह तेज, आधुनिक, स्वचालित और कुशल ट्रांजिट सिस्टम होगा। शुरुआती चरण में 9 स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें से 2 स्टेशनों के पास पार्किंग की सुविधा भी होगी। एक कंट्रोल रूम और एक अल्ट्रा पॉड पार्किंग फैसिलिटी भी बनेगी। परियोजना 15 महीने में पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य है।
क्या है फायदा… यह परियोजना पुराने सचिवालय परिसर को आसपास के प्रशासनिक भवनों से जोड़ेगी। इसे एक स्मार्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी समाधान के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे बिना अनशेड्यूल्ड हॉल्ट के यात्री सीधे गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। बाहरी बाधाओं का जोखिम भी कम होगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
