पटना में 8 लाख की नकली दवाएं जब्त:ग्रामीण जिलों में होती थी सप्लाई
पटना के रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र में औषधि नियंत्रण प्रशासन ने एक निजी मकान में चल रही नकली दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में लगभग आठ लाख रुपये मूल्य की नकली दवाएं, रैपर, नामी कंपनियों के लेबल और दवा बनाने वाली मशीनें बरामद की गईं।
अधिकारियों के अनुसार, सुनील कुमार झा इस रैकेट का मुख्य आरोपी और फैक्ट्री का मालिक है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि, जांच में यह अवैध फैक्ट्री ‘विभा बायोटेक’ नाम से संचालित पाई गई। यहां गैस, कफ सिरप, दर्द, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों की नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। बरामद नकली दवाओं में लिव 52 कफ सिरप, इबुजेसिक प्लस सिरप और कॉस्ग्लो न्यू क्रीम जैसी प्रमुख दवाएं शामिल हैं।
दवा एजेंसियां और फार्मा कंपनियां रडार पर
इस नकली दवा रैकेट में लगभग आधा दर्जन दवा एजेंसियां और फार्मा कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं। सुनील ने इस रैकेट के संचालन के लिए सैकड़ों लोगों को मार्केटिंग और ग्रामीण जिलों में दवाओं की आपूर्ति तथा ऑर्डर लेने के लिए नियुक्त किया था।
पटना सहित कई जिलों में हो रही सप्लाई
ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि यह रैकेट मुख्य रूप से बिहार के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय था। यहां मरीजों को सस्ती दवाओं का लालच देकर धोखा दिया जा रहा था। इन नकली दवाओं की आपूर्ति पटना के अलावा पूर्णिया, मधेपुरा, दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज, सहरसा और सिवान जैसे ग्रामीण जिलों में भी की जा रही थी। इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा था।छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और नकली दवाओं की सप्लाई कर बड़ी संख्या में लोग इससे मुनाफा कमा रहे थे।
अब इस मामले में और लोगों की तलाश की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। ड्रग इंस्पेक्टर ने इस कार्रवाई को सफल बताते हुए कहा कि अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी छापेमारी शुरू की जाएगी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि नकली दवाओं के कारोबार पर कड़ी नजर रखी जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलवाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
